52 शक्तिपीठ में से एक है चामुंडा का दरबार, यहां गिरा था माता का रुधिर

कलयुग की कलम/देवास 

देवास. शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत रविवार को माता की घटस्थापना के साथ हुई। इस पर्व के शुरू होते ही माता मंदिरों में भक्ताें की भीड़ उमड़ने लगी है। इसके पहले नवरात्रि पर राज परिवार की ओर से माता को गहने अर्पित किए गए। नवरात्र में देवास माता टेकरी पर मां चामुंडा और तुलजा भवानी के दर्शन को भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। 

52 शक्तिपीठ में से एक है चामुंडा का दरबार!

विद्वानों के मुताबिक देवी के 52 शक्तिपीठ में से मां चामुंडा, तुलजा दरबार को एक शक्तिपीठ के तौर पर माना जाता है। देश के अन्य शक्तिपीठों पर माता के अवयव गिरे थे, लेकिन ऐसा बताया जाता है कि यहां टेकरी पर माता का रुधिर गिरा था। इस कारण मां चामुंडा का प्राकट्य यहां हुआ। चामुंडा को सात माताओं में से एक माना जाता है। तुलजा भवानी की स्थापना मराठा राज परिवारों ने करवाई थी। मराठा राजाओं की यह कुलदेवी मानी जाती हैं। यह दोनों माताएं सगी बहनें हैं। दो हजार साल से भी अधिक समय पूर्व महाराज विक्रमादित्य के भाई भर्तहरि यहां तपस्या कर चुके हैं।

मां का आधा धड़ समाया है जमीन में

देवी मां के दोनों स्वरूप जागृत अवस्था में हैं। बड़ी मां तुलजा भवानी और छोटी मां चामुंडा देवी बहनें हैं। ऐसी मान्यता है कि एक बार दोनों में विवाद हो गया। गुस्साई दोनों माता टेकरी छोड़कर जाने लगीं। बड़ी मां पाताल में और छोटी मां टेकरी ने नीचे उतरने लगीं। माताओं को जाता देख उन्हें मनाने के लिए बजरंगबली और भेरूबाबा उनके पीछे चल दिए। जब तक बड़ी मां का गुस्सा शांत होता उनका आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वहीं छोटी माता टेकरी से काफी नीचे उतर आईं थीं, इस कारण बड़ी मां और छोटी मां उसी रूप में टेकरी में रुक गईं।





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