विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह का समापन

KKK न्यूज रिपोर्टर
          नैनी
       सुभाष चंद्र 

प्रयागराज 15 अक्टूबर : राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व मानसिक 

 जागरूकता सप्ताह का समापन सकुशल किया गया | जिसके अंतर्गत थीम "आत्महत्या रोकथाम पर मिलकर कार्य करना व प्रतिदिन 40 सेकंड की कार्यप्रणाली अपनाना" पर जागरूकता की गयी | जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत कई पराक्र के कार्यक्रम किये गए जिसमे गोष्ठी, प्रतियोगिता, मानव श्रृंखला, मानसिक विकलागता प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया |  डॉ. वी.के मिश्रा अपर मुख्य चिकित्साधिकारी नोडल एन.सी.डी सेल ने बताया कि जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रयागराज द्वारा कई कार्यक्रमों की पहल की गई जिसे पहली बार देश मे शुरू किये गए जैसे मोबाइल नशा मुक्ति केंद्र, गुड टच बैड टच, सुसाइड प्रिवेंशन सेल, की सफलता के बाद पूरे प्रदेश एवं देश मे शुरू किया गया हैं | मानसिक स्वास्थ्य के लिए जागरूकता बहुत आवश्यक है जिससे हम मानसिक विकार से दूर रह सकते हैं स्वस्थ मन ही  स्वस्थ्य एवम समजपयोगी व्यक्तित्व बनाता है मानसिक रोग की पहचान, संबंधित सलाह, इलाज एवम मनोवैज्ञानिक सलाह निःशुल्क आम जनमानस हेतु उपलब्ध है | डॉ. वी. के सिंह मुख्य चिकित्सक अधीक्षक मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय ने बताया कि प्रदेश की पहली मानसिक स्वास्थ्य सेवा  हेल्प लाइन नंबर पर  काल्विन हॉस्पिटल से शुरू की गयी जिस पर कॉल करके कोई कभी भी सहायता ले सकता हैं | डॉ. राकेश पासवान मनोचिकित्सक परामर्शदाता ने बताया कि इस पूरे सप्ताह में कुल 1134 मरीज देखे गए, 162 मानसिक विकलांगता के प्रमाणपत्र जारी किये गए, 250 गंभीर बीमारी के मरीज देखे गए, 15 ऐसे मरीज संपर्क में आये जिन्हें भूत प्रेत वाली मानसिक बीमारी ग्रस्त थे मोबाइल की लत से ग्रस्त 11 मरीज तथा आत्महत्या की भावना वाले 12 रोगियों के केस में हस्तक्षेप किया |उन्होंने बताया की सप्ताह के अलावा भी मानसिक विकार से ग्रस्त व्यक्ति के लिए मंडलीय चिकित्सालय काल्विन में भी कई प्रकार की सुविधाएँ मौजूद हैं जिसमे संगीत चिकित्सा, मन कक्ष, मोबाइल नशा नशा मुक्ति केंद्र, आत्महत्या  निषेध प्रकोष्ठ का संचालन किया जा रहा हैं | जिसमे प्रतिदिन लगभग 125 मरीज इलाज के लिए आते हैं | आम तौर पर आज कल अधिकतर लोग निराशा एवं अवसाद से ग्रस्त हैं  जब लोग इच्छा अपुरूप सफलता नही पाते हैं या सामाजिक स्तर पर तुलनात्मक प्रतिक्रिया मिलती हैं तो वो निराश होकर डिप्रेशन की ओर जाने लगते हैं जैसे नींद न आना, सर दर्द होना, परेशान रहना अवसादो में घिरे रहना आदि,  जहाँ से मानसिक विकार की शुरुवात होने लगती हैं | उपाय – ऐसे में जल्द से जल्द मनोचिकित्सक से सलाह ले, परिवारजनों, दोस्तों, रिश्तेदारों से बात करे अपने निकटतम व्यक्ति से परेशानी को साझा अवश्य करे | डॉ ईशान्या राज नैदानिक मनोवैज्ञानिक ने बताया कि मानसिक परेशानी सिर्फ बड़े लोगो में नहीं बल्कि बच्चो में भी तेजी से बढ़ रही हैं पढाई का बोझ, मोबाइल की लत, प्रतिस्पर्धा से बच्चे भी मानसिक विकार से जूझ रहे हैं जिससे बचाव के लिए बच्चो को अपने माता पिता के साथ बैठ उन्हें बच्चे को समय देना होगा तथा उनके मन में चल रही दुविधाओं को जानने की कोशिश करनी होगी ताकि बच्चे उनसे खुल कर बात कर सके और उनके बीच की दूरियां कम हो जिससे शुरवाती दौर में ही परेशानियों का पता चल जाए और पारिवारिक जुडाव भी बना रहे |

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