खिरहनी मैं दूसरी पीढ़ी के स्थानीय कलाकार कर रहे, भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन

Kkkन्यूज रिपोर्टर कटनी/स्लीमनाबाद ;-  वर्ष 1964 में खिरहनी गांव के कुछ बुजुर्गों ने मिलकर भगवानी श्रीराम की लीलाओं के मंचन की परंपरा शुरू की थी। उस परंपरा को गांव के युवा व बुजुर्ग 55 साल से निभाते चले आ रहे हैं। हर साल नवरात्र से पूर्व 15 दिनों तक रामलीला का मंचन गांव में स्थानीय कलाकार ही करते हैं और वर्तमान में दूसरी पीढ़ी परंपरा का निर्वहन कर रही है। वर्ष 1964 में खिरहनी निवासी मालगुजार लाल बहादुर श्रीवास्तव ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर स्थानीय कलाकारों को मंच देने के लिए श्रीव1008 जगदीश धाम रामलीला समिति की स्थापना की थी।कुछ सालों जो हर साल नवरात्र में जगदीश धाम मंदिर मे भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन करती थी और नए कलाकारों को भी उससे जोड़ती थी। लीला के अलावा विभिन्न कथाओं पर आधारित नाटकों का मंचन भी किया जाता था।जिसे देखने सैकड़ों लोग पहुंचते थे। दूसरी पीढ़ी में लालबहादुर श्रीवास्तव केअशोक श्रीवास्तव समिति अध्यक्ष रहते हुए परंपरा को जीवित रखे हुए है।

आज भी पहुंचते हैं उत्साह बढ़ाने -

समिति के शुरुआत के दिनों से जुड़े गांव के बुजुर्ग  आज भी मंचन के दौरान कलाकारों का उत्साह बढ़ाने पहुंचते हैं। उनका कहना है कि यह कलाकारों की कला को सामने लाने का मंच स्थापित हुआ था और खुशी होती है कि बुजुर्गाे की परंपरा को युवा जीवित रखे हुए हैं। पूरी कमेटी का संचालन भागीरथ द्विवेदी के हाथों में होता है। इस वर्ष भी भगवान की लीलाओं को मंचन स्थानीय कलाकार कर रहे हैं।

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