मेरे मुल्क हिंदुस्तान से संप्रदायिकता खत्म करने भेदभाव खत्म करने के लिए एक काम कर ले

(1)सबसे पहले धार्मिक कार्यक्रमों में राजनीतिक बात करना बंद हो पार्टियों के कार्यों की सराहना करना ठीक है लेकिन उनकी समर्थन करने की बात ठीक नहीं किसी भी पार्टी और संगठन से ज्यादा महत्वपूर्ण ताकतवर बलशाली ईश्वर धर्म और समाज होता है लेकिन किसी एक पार्टी को धार्मिक कैटेगरी से मापना उचित नहीं

(2) राजनीतिक कार्यक्रमों में किसी एक धर्म का नारा लगाना या किसी एक धर्म समाज की बात करना या किसी धर्म को छोटा या गलत बताना और भी बंद होना चाहिए मानवता समाज सेवा एकता की बात हो क्योंकि जितने भी राजनीतिक पार्टियां हैं और उनके जो कार्यकर्ता है।

 पदाधिकारी हैं सब सभी समाज के उत्थान के लिए और देश की व्यवस्थाओं के लिए चुने गए हैं।

 ऐसे में उन्हें व्यवस्थाओं को लेकर ही चर्चा करना चाहिए ना किसी धर्म ना किसी समाज का नारा लगाना और ना किसी धर्म की बातों पर उलझना उलझाना

(3)जब राजनीति धर्म से परे हो जाएगी तब जाकर एकता की बुनियाद पड़ेगी सामाजिक टूट मुल्क के टूट का कारण बन रहा है।

 देश को एक प्लेटफार्म में लाने के लिए राजनीति को समाज सेवा से विकास से और दे की व्यवस्था

शिक्षा रोजगार से जोड़ कर देखा जाए

अगर हम किसी एक समाज और धर्म को लेकर चलेंगे तो भेदभाव होना निश्चित है।

 समाज का बटवारा देश का बंटवारा जाति धर्म का बंटवारा हमारे देश की सुख शांति को पलीता लगाते नजर आ रहा है।

(4) राजनीतिक कार्यक्रम को सामाजिक मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे से करना बंद होना चाहिए उसके लिए समस्त समाज के अनुयायियों को चाहिए कि वह ऐसे कार्यक्रमों का विरोध करें जो धार्मिक सामाजिक स्थलों में हो

(5) अगर कोई राजनेता जब पार्टी का मुखिया किसी मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा धार्मिक स्थल में जाता है तो उसे मीडिया ना दिखाएं क्योंकि वह उसका कर्तव्य है पूजा आराधना करना उसकी आवश्यकता है।

 और यह कोई नया काम नहीं है हर व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धर्म समाज के लिए सजग रहे पूजा आराधना करता रहे

पांच संदेश 

           लेखक

 अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम  9753687489

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