लाल बहादुर शास्त्री जब कोंग्रेस पार्टी के महासचिव थे तब उन्हें 60 रुपए महीने तनख्वाह मिला करती थी जिसे ले जाकर वे अपनी पत्नी को सौंप दिया करते जो उस रकम से महीने का सारा खर्च चलाया करतीं।

कलयुग की कलम पत्रिका न्यूज़,

एक बार शास्त्री जी का एक करीबी मित्र अपने बेटे के ऑपरेशन के लिए उनसे 60 रुपए उधार माँगने पहुँचा। शास्त्री जी ने कहा : " मेरी कुल तनख्वाह ही 60 रुपए है जिससे मेरे परिवार का महीने भर का खर्च चलता है। अब तुम बताओ मित्र मैं कहाँ से तुम्हें 60 रुपए दूँ ? "

शास्त्री जी की पत्नी दोनों मित्रों का वार्तालाप सुन रही थीं।

उन्होंने कहा : " उनकी आज की जरूरत अधिक महत्वपूर्ण है। मेरे पास 60 रुपए हैं, आप उन्हें ये रुपए दे दीजिए। "

शास्त्री जी ने पत्नी से पैसे लेकर मित्र को दे दिए और मित्र के प्रस्थान के पश्चात पत्नी से पूछा : *" ये रुपए तुम कहाँ से लाईं ? "

पत्नी ने जवाब दिया : " आपकी तनख्वाह से हर महीने मैं 5 रुपए बचा लेती थी इस तरह पिछले 12 महीनों में 60 रुपए जमा हो गए थे। "

इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री ने कोंग्रेस अध्यक्ष को एक पत्र लिखा और खुद की  तनख्वाह 55 रुपए कर दिए जाने का निवेदन किया और कारण में बताया कि उनके घर का महीने भर का खर्च 55 रुपयों में चल जाता है।

आज 2 अक्टूबर, लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन....!!!!

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