गीत 

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दिल में हलचल सी क्यों मचा के जा रही हो कुछ बता दो ऐ जानेमन अब क्यूं शर्मा रही हो ? वादे पे हम मर मिटे थे तेरे खातिर ऐ जानम कुछ भी नही सूझता था तुझ बिन मेरे ऐ सनम । अब तो करीब आ जाओ  ना मुझको तुम इतना सताओ  कुछ बता दो ऐ जानेमन  अब क्यूं शर्मा रही हो  दिल में हलचल सी - - - - - -  लोगों ने दी थी नसीहत  जैसे गमों की वसीयत  ऊंगली उठी जो तुम पे मेरी हुई थी फ़जीहत । अश्कों की सच्चाईयों से  मन अपना बहला रही हो  कुछ बता दो ऐ जानेमन  अब क्यूं शर्मा रही हो ?  दिल में हलचल सी - - - - - - 

                गीतकार 

         डॉ.मन्तोष भट्टाचार्य मदर टेरेसा नगर ,जबलपुर   ( म.प्र)

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