दूरसंचार जैसी सेवाओ में एक से अधिक प्रायवेट कम्पनियां सेवा दे सकती है तो विद्युत वितरण कम्पनी सिर्फ एक ही क्यों?

आजादी के बाद से हर क्षेत्र में आधुनिकता के साथ-साथ तेजी से विकास हुआ है। किन्तु विद्युत सप्लाय एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आज भी 60 साल पुरानी पद्धति से बिजली वितरित हो रही, इसमे कोई विशेष आधुनिकता नजर नही आई।

वर्तमान में हर क्षेत्र में एक से अधिक सेवादाता कम्पनियां है, जो सरकार से मान्यताप्राप्त होकर जनता को सेवाएं दे रही है जैसे दूरसंचार, सड़क यातायात हो या फिर वायु यात्रा हो, इसी तरह स्कुल, कालेज , अस्पताल सभी तरह के क्षेत्र में निजीकरण हुआ है। सेवाओ में एक मात्र विद्युत वितरण ही ऐसी सेवा है जिसमे किसी तरह की प्रतिस्पर्धा नही होने से आम जनता तो सरल और सुलभ ओर सस्ती बिजली नही मिल पा रही है। 

आज भे हजारों गाँव ऐसे है जहाँ बिजली नही पहुंची है, ओर जहां दुर्गम क्षेत्र में बिजली पहुंची भी है तो वहाँ बहुत कम बिजली मिलती है।

सरकार चाहे तो एक से अधिक प्रायवेट विद्युत वितरण कम्पनियां बना सकती जो सोर ऊर्जा या पवन ऊर्जा से बिजली बनाकर अपने आस-पास के घरों में गांवों में कम दर पर बिजली बेच सके। 

यह सम्भव है कोई बड़ा काम नही है। एक से अधिक कम्पनियां रहेगी तो प्रतिस्पर्धा के चलते जनता को कम से कम दाम में बिजली मिल सकेगी। साथ ही सरकार बिजली वितरण को आधुनिक बनाने के लिए भूमिगत लाइन डालकर बिजली वितरण की अनिवार्यता कर आधुनिकीकरण की ओर कदम बढ़ा सकती है।

बलराम यादव, बड़वानी

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