पुलिस की पिटाई से युवक की मौत, हंगामा बढ़ते देख SI और आरक्षक को किया सस्पेंड

कलयुग की कलम/सतना

सतना जिले की पुलिस जिसने अभी हाल में ही बबली कोल का इनकाउन्टर करके वाहवाही लूटी ही थी कि उप्र पुलिस ने इस पर सवाल खड़े कर दिए थे, ठीक इसी तरह की कुछ घटना नागौद के थाना में भी हुई जंहा पर पुलिस ने जुआ खेल रहे लोगों पर दबिश दी और फड़ में बैठे लोग चम्पत हो गए लेकिन वहीं पर एक युवक मिला जिसे भरपाई करने के लिए पुलिस थाने ले आई और बघेलखण्ड की प्रसिद्ध लोकोक्ति 'गदहा से न जीतै गदहिया के कान उमेटै' को चरितार्थ करते हुए रात भर उसे इस उम्मीद से मारती रही कि शायद वह यह कह दे हाँ उपरोक्त फड़ का मालिक और कर्ता-धर्ता मैं ही हूँ।

लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था उस युवक की मौत रात को ही लॉकअप में हो गई जिसे थाने के होनहार जवाज़ों ने सुबह अस्पताल में यह कहकर छोड़ दिया कि इसकी हालात खराब है। आनन फानन में जब इसकी सूचना घरवालों को लगी तथा पुलिस के द्वारा एक बेगुनाह को मारने की खबर जब हवा की तरह नागौद में फैली तो मानो भीड़ का सैलाब आ गया और परिजनों के साथ लोग SDM कार्यलय में इकट्ठा हो गए और न्याय दिलाये जाने तक लाश को हटाने के लिए तैयार न थे। मामले की जानकारी पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह को लगी और वो भी परिजनों के साथ न्याय के लिए अड़ गए कलेक्टर एसपी से उन्होंने पीड़ित को उचित न्याय और दोषियों पर कार्यवाही के लिए माँग की। मामले को तूल पकड़ता देख सतना जिले के SP  रियाज इकबाल ने एक SI और आरक्षक को निलंबित कर दिया।

सूचना ये भी है कि जल्द ही TI भी जाँच के घेरे में आयेंगे।

क्या कहना है घर वालों का

घर वालों का कहना है कि पुलिस सट्टा और जुआ की मनगढ़न्त कहानी बनाकर अपने को बेदाग करने की कोशिस में लगी है जबकि मृतक युवक रम्मू नामदेव का इससे कोई लेना देना नहीं।

प्रत्क्षयदर्शियों ने कहा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब पुलिस ने जुआ खेल रहे लोगों पर छापा मारा तो वँहा बैठे सभी लोग नौ दो ग्यारह हो गए और वँही नजदीक बैठे रम्मू नामदेव को पुलिस अपने साथ उठाकर ले गई। फिलहाल तो एक महिला SI और 2 कॉन्स्टेबल को रियाज इकबाल ने यह मानते हुए सस्पेंड किया है कि मौत पुलिस अभिरक्षा में ही हुई है।

वर्दी फिर कलंकित क्यों?

नागौद पुलिस ऐसा पहली बार नहीं कर रही यँहा का थाना अपराधियों की शरणस्थली बना हुआ है नागौद थाने के परिक्षेत्र में आने वाले सभी अनैतिक कार्यों में पुलिस की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। मसलन हालात ये हो गाये हैं कि कोई भी सभ्य आदमी नागौद थाने में रिपोर्ट या सूचना देने की जगह सीधे SP कार्यालय पहुँचता है। सवाल ये है कि देशभक्ति जनसेवा का पाठ पढ़ने वाली पुलिस खुद अपराधों से अपने आप को कलंकित क्यों कर रही या फिर वर्दी के अहम में वह यह भूल बैठी है कि उसके अंदर भी एक इन्सान है। फिलहाल हो हल्ला को खत्म करने के लिए सस्पेंड तो कर दिया गया लेकिन क्या इन वर्दीधारी गुंडो के ऊपर हत्या का मुकदमा डिपार्टमेंट चलाकर अपने आप को बेदाग करेगा या चुपचाप मामला ठंडा होने का इंतज़ार करेगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।






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