फिशमैन / नहाने आते थे तो शरीर की खुशबू से इकट्ठा हो जाती थीं मछलियां, अब रोज खिलाते हैं 5 किलो सेंव 

महेश्वर. नमकीन व्यवसायी अनिल मनोरे बताते हैं कि करीब ढाई साल पहले नर्मदा में नहाने पहुंचे तो उन्होंने महसूस किया कि मछलियां तेजी से उनकी ओर आ रही हैं। पहले घबराए लेकिन फिर उन्हें समझ में आया कि शायद शरीर से नमकीन खुशबू आ रही है और कुछ सेंव कपड़े में चिपके होंगे जिन्हें खाने मछलियां आ गई। इसके बाद वे रोज 5 किलो सेंव लेकर आते हैं और मछलियां खूब दावत उड़ाती हैं। गहराई में रहने वाली महाशीर, कतला, रोहू भी सुगंध से पानी की सतह पर आ जाती हैं। पानी में नमकीन गिरते ही आधा किलो से 15 किलो तक की मछलियां आधा फीट ऊपर पानी में उछल जाती हैं।  ढाई साल में वे करीब 4 लाख रुपए के सेंव मछलियों को खिला चुके हैं। सचिन महाजन, शरद श्रीमाली, नन्नू प्रजापति, कालू राठौड़, पप्पू दरबार, बताते हैं आटे की गोलियाें से कम मछलियां आती हैं। मछलियों के स्वाद में बदलाव देखकर नर्मदा किनारे फुटकर दुकानदार चने-आटे की गोलियों के साथ नमकीन भी रखने लगे हैं। लोग अनिल को फिशमैन भी कहने लगे हैं। जलीय पौधों से ज्यादा मछली के विकास में सहायक जूलॉजी शिक्षक बीएल कुशवाह बताते हैं मछलियां जलीय पौधों व छोटी मछलियों से भोजन में मुख्यत: प्रोटीन व वसा लेती हैं। इससे उनका विकास व अंडाेत्सर्जन तेजी से होता है। जलीय परिवेश में न मिलने पर सोयाबीन, मूंगफली की खली व अन्य स्रोतों से देते हैं। सेंव, मिक्चर, पपड़ी, बेसन तेल में तैयार होते हैं। उसमें प्रोटीन व तेल में वसा होता है इसलिए वे इसे तेजी से ले रही हैं। नॉलेज : मछलियां ऐसे तलाशती हैं भोजन कतला ऊपरी स्तर में, रोहू मध्य व नैनी मछली जल के निचले स्तर में भोजन तलाशती हैं। पांच-छह फीट की गहराई में मछलियां तेजी से बढ़ती हैं।मछली पालक चंपालाल वर्मा बताते हैं मछली सोयाबीन, मूंगफली व खली खिलाते हैं।जलीय पौधों के अलावा चना, चावल व परमल के अलावा मूंगफली व उसकी खली मछली का भोजन हैं। नमकीन से कोई नुकसान नहीं।धीरेंद्रसिंह सोलंकी, सहायक संचालक मत्स्य खरगोन

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