देश गुलाम था मगर बीका नहीं देश के महान पुरुषों के अंदर का देश प्रेम गुलाम मुल्क में  पला बढ़ा  और ज्वाला बनकर फूटा अब देश का क्या होगा

 देश के अंदर तोड़ पैदा करना जाति धर्म संप्रदाय को बांटना बांटने के उपाय और षड्यंत्र करना यह अंध भक्तों का काम है यह सदा से ऐसा करते आए हैं । बेचारे अनपढ़ गरीब मजदूरों को अंधविश्वास और श्रद्धा के नाम पर   लाडाना  चाहते हैं । कहीं गजवा ए हिंद के नाम से भड़काना  कहीं घर वापसी तो कहीं मॉब लिंचिंग करके देश के स्वाहद्र को बिगाड़ने की कोशिश करना हैं। यह दोहरी और दोगली राजनीति नहीं चलेगी हर व्यक्ति आज 1-1 कोणी के लिए परेशान हैं घर चलाना मुश्किल हो रहा है बेरोजगारी चरम पर है और यह गजवा ए हिंद की बात करते हैं बेचारे मुसलमान भी तो परेशान ही हैं उनके व्यापार बैठे पड़े हैं अब कोई गजवा ए हिंद जैसी कोई चीज़ नहीं है यह देश को बांटने वाले मित्रों  के दिमाग में पनपा हुआ एक नफरत का बीज है इसके अलावा कुछ नहीं इस देश को बर्बाद करने के लिए यह सत्ताधारी पार्टियां ही काफी है इंसान तो इंसानियत समाज धर्म कुछ भी सुरक्षित नहीं हैं। दरिंदे बहन बेटियों की इज्जत ओं को रौंद रहे हैं। घर बैठे लोगों का कत्ल हो रहा है कहीं कमलेश तिवारी तो कहीं तवरेज आलम मारे जा रहे हैं । और उनके नाम पर राजनीति हो रही है यह कब तक चलेगा।इसके बाद कहते हैं एक हो जाओ एकता लाने के लिए एकता की बात नहीं अभियान चलाना पड़ेगा । एक दीप चलाना पड़ेगा देश को संप्रदाय वाद से मुक्त करने के लिए वह पुरानी दीपावली वह पुरानी होली वह पुरानी  ईद वह पुरानी होली वह पुरानी कृसमिस डे और  गुरु गोविंद जी का त्यौहार फिर एक साथ मनाना पड़ेगा। दलित की बेटी पंडित के आंगन में खेले  पंडित का बेटा पठान के आंगन में और पठान की बेटी का कन्यादान ब्राह्मण करें  चलो हम सब मिलकर सम्प्रदायवाद जाति वाद से देश को मुक्त करें । अपने अपने धर्म पर जमे रहे अमल करें और दूसरे धर्मों का सम्मान करें हमदर्द बनें

एक भारत श्रेष्ठ भारत

       लेखक 

अब्दुल कादिर खान 

कलयुग की कलम

 मोबाइल 9753687489

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