ढीमरखेड़ा जनपद सीईओ द्वारा लगातार बरती जा रही है लापरवाही, जनता हो रही परेशान

कांग्रेस मंडलम अध्यक्ष ने किया विधायक से शिकायत 

एम एस पटेल सम्पादक कलयुग की कलम 

कटनी/ ढीमरखेड़ा :- ढीमरखेड़ा जनपद सीईओ के के पांडे के द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है।जनपद सीईओ समय पर कार्यालय में नहीं बैठते हैं। दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र से गरीब जनता थककर आती हैं।सीईओ के नही मिलने पर निरास होकर घर लौट जाती है। इन दिनों ढीमरखेड़ा क्षेत्र में कुछ ऐसे मामले हैं जो चर्चा का विषय बने हुए है। लेनदेन के मामले को लेकर लोकायुक्त की कार्यवाही होने के बाद कैसे इन्हें जनपद की कमान सौंपी गयी है। अधिकारी की मनमानी के संबंध में कांग्रेस के ढीमरखेड़ा मण्डलम अध्यक्ष ओंकार शर्मा ने विधायक विजयराघवेंद्र सिंह से शिकायत कर अधिकारी की मनमानी के संबंध में अवगत कराया है। विधायक सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर समस्या निराकरण कराने का आश्वासन दिया है।हालांकि जनपद सीईओ कई मामले ऐसे हैं जो क्षेत्र में चर्चाओं में शामिल हैं। 

 (1) बीते 4 नवंबर को जिला पंचायत सीईओ जगदीशचंद्र गोमे ने गूंड़ा ग्राम पंचायत सचिव राकेश साकेत को निलंबन और परसेल रोजगार सहायक प्रदीप पटेल की सेवा समाप्ति करने का आदेश दिया था लेकिन जनपद सीईओ द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। 

(2) जुलाई माह में प्रतिबंधित होने के बावजूद मनरेगा योजना के तहत मस्टररोल निकलवाकर काम करवाया गया।पंचायतों की शिकायत कर जांच करवाकर लेनदेन किया जा रहा है।

(3) स्वकराधान योजना के तहत जनपद की 12 पंचायतों में राशि आने के बाद जिन पंचायतों में जनपद सीईओ का लेनदेन नहीं हो पा रहा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जबकि घुघरी और महनेर ग्राम पंचायत में राशि निकालने के बाद कार्यवाही नहीं की गई है। 

(4)ग्राम पंचायत शुक्ल पिपरिया के सचिव- सरपंच ने जिला पंचायत सीईओ से पूर्व रोजगार सहायक अजय कोरी द्वारा फर्जी तरीके से मस्टररोल निकालकर राशि हड़पने की शिकायत किया। जनपद सीईओ ने दोषी जीआरएस को बचाकर शिकायतकर्ता सचिव के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी।

(5) ग्राम पंचायत सगौना में पदस्थ रोजगार सहायक सरमन सिंह को झूठे आरोप लगाकर सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रोजगार सहायक ने अधिकारी की लेन-देन की बात को पूरा नहीं किया तो कार्रवाई की गई है।

(6)निजी ऑपरेटर की पोस्टिंग कराकर मनमाने तरीके से आदेश बनाए जाते हैं। सचिव सरपंच और रोजगार सहायकों पर दबाव बनाया जा रहा है।


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