नशे की लत बर्बाद कर रहा युवाओं का भविष्य

कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ सहित पूरे कोयलांचल (झगराखाण्ड, लेदरी, खोंगापानी) एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रो में गांजे का कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है, शहर सहित गांव की गलियों में बिक रही नशीली वस्तुएं युवाओं की जिंदगी तबाह कर रही हैं। स्थिति यह है कि नगर में जगह-जगह  गांजे की बिक्री हो रही है। गली मोहल्लों में गांजा आसानी से मुहैया हो रहा है।

जिसके लिए शासन प्रशासन कोई अवरोधात्मक कार्रवाई करते हुए नजर नहीं आ रहा है। परिणाम स्वरूप यह गोरखधंधा दिन दूरी रात चौगुनी फल-फूल रहा है। चूंकि गांजा एक प्रतिबंधित मादक पदार्थ है। क्षेत्र में गांजे की बिक्री पूर्ण रूप से वर्जित है और इसको रोकने के लिए आबकारी एवं पुलिस विभाग को अनेक अधिकार एवं साधन सुविधा सरकार द्वारा मुहैया करायी गयी है। बावजूद इसके गांजा सेवन करने वाले नशेडियों को हर जगह आसानी से गांजा उपलब्ध हो जा रहा है। अब गांजे का कारोबार ग्रामीण अंचलों में कुटीर उद्योग का रुप अख्तियार करता जा रहा है। इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए नारकोटिक्स एक्ट बनाया गया है, लेकिन पुलिस व आबकारी विभाग गांजे की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पा रहा हैं।

नशे की गिरफ्त में फंसकर बर्बाद हो रहा देश का भविष्य

 देश की प्रमुख समस्याओं में से एक युवाओं में तेजी से फैलती नशे की प्रवृत्ति है। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में आकर आज देश का युवा वर्ग तेजी से नशे का आदी होता जा रहा है। नशा एक ऐसी विकट समस्या है, जिसमें फंसने वाला युवक ही नही बल्कि उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है।

नशे के आदी युवा न सिर्फ समाज के लिए घातक होते है बल्कि अपराध को भी बढ़ावा देते हैं। नशा कई तरह का होता है जैसे शराब, गांजा, अफीम, हेरोईन, कोकीन, चरस, सिगरेट मुख्य है। नशा एक ऐसी आदत है, जिसके चंगुल में फंसने के बाद व्यक्ति न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक व आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाता है।

नशाखोरी फैलने का कारण 

आज देश के युवा तेजी से नशे के आदी होते जा रहे है। जिसके फैलने के कुछ प्रमुख कारण है। 

सरकार देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तमाम कदम उठा रही है। समाज के एक बड़े तबके में अशिक्षा फैली हुई है। नशे की गिरफ्त में अधिकतर अशिक्षिक युवा ही आते है। 

समाज व देश नशाखोरी के भयंकर परिणाम को जानता है फिर भी यहां नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री होती है। आसानी से उपलब्ध होने के कारण ही अधिकतर युवा इसकी चपेट में आ रहे है। 

 कभी-कभी व्यक्ति पारिवारिक तनाव के चलते नशा करने लगता है लेकिन वह नशे के अलावा गरीबी, घरेलू कलह आदि से भी ग्रस्त हो जाता है।

 नशाखोरी के दुष्परिणाम

 नशा एक ऐसी समस्या है जो बेरोजगारी व भुखमरी को जन्म देती है। 

 नशाखोरी की वजह से ही घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ती है। 

 नशा किसी अपराध से कम नही है। नशे की तलब को पूरा करने के लिए व्यक्ति छोटे से लेकर बड़े अपराध तक कर बैठता है। 

नशे की लत से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है और व्यक्ति तमाम बीमारियों की चपेट में आ जाता है।  

 नशेबाज इंसान अपने नशे को परिवार से ज्यादा अहमियत देता है, जिसके कारण परिवार टूट जाते है।

मनेंद्रगढ़, जिला कोरिया, छत्तीसगढ़ से संजीव गुप्ता के साथ राजेश सिन्हा की खास रिपोर्ट

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