रतलाम -आंखों में यदि मुस्कान है तो इंसान तुमसे दूर नहीं, आंखों में यदि उड़ान है तो आसमान तुमसे दूर नहीं, एक वृक्ष पर बैठकर पक्षी ने यही गीत गुनगुना या श्रद्धा में यदि जान है तो भगवान तुमसे दूर नहीं है जब भगवान हमसे दूर नहीं तो गुरु कहां से दूर हो सकते हैं। श्री मोती लाल गुगलिया, लालचंद मुनोत, अनिल मुनोत, की भाव भरी विनीति को स्वीकार कर उनकी श्रद्धा आस्था और विश्वास को मद्देनजर रखते हुए आचार्य प्रवर का पदार्पण रतलाम में हुआ। कार्यक्रम में समन्वय मिशन के प्रेरक, सर्व धर्म दिवाकर, क्रांतिकारी, आचार्य प्रवर श्री दिव्यानंद सुरीश्वर जी महाराज सा.(निराले बाबा) ने अपने प्रवचन में कहा दिल में यदि सच्चा प्रेम हो तो भगवान दौड़े चले आते हैं। व्यक्ति की श्रद्धा पानी में पड़े पत्थर के समान होनी चाहिए जो पानी की हजारों लहरों व धाराओं के बीच में अपने आपको स्थित रखता है अपने अंदर पानी को प्रविष्ट नहीं होने देता ना कि ऐसी हो जैसे कि मिट्टी को ढेला जो पानी की कुछ बूंदों से पिघलने लगता है बिखर कर जाता है। श्रद्धा का उदाहरण देते हुए निराले बाबा ने स्वामी विवेकानंद व स्वामी रामकृष्ण परमहंस के प्रसंग को सुनाया कि स्वामी परमहंस निरक्षर होते हुए भी स्वामी विवेकानंद सरस्वती जैसे विद्वान के गुरु थे। व्यक्ति थोड़े से सामाजिक आर्थिक उतार-चढ़ाव से ही विचलित हो जाता है। कई बार उसे अंधविश्वास में श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है अपने देवगुरु धर्म पर व्यक्ति हताश बेकार हो जाता है। तो परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं। स्वस्थ भी गिरने लग जाता है। लेकिन जिसकी श्रद्धा पत्थर की तरह मजबूत होती है वह ऐसे समय को भी धीरज व संयम से व्यतीत कर लेता है। 

 रतलाम- उन्हेल जिला उज्जैन मध्य प्रदेश में समन्वय चातुर्मास 2019 रुप से संपन्न करने के पश्चात पंजाब व अन्य क्षेत्रों में विविध कार्यक्रम संपन्न करवाते हुए निराले बाबा रतलाम पहुंचे। रतलाम पहुंचने पर आचार्य प्रवर के स्वागत शोभायात्रा का आयोजन किया गया। छाजेड़ मार्केट चांदनी चौक से शोभायात्रा प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए नंद भवन रामगढ़ में धर्म सभा के रूप में परिवर्तित हो गई। 

आचार्य प्रवर के मंगलाचरण से धर्म सभा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर प्रेम उपाध्याय नगर निगम पार्षद जल निकाय मंत्री, ललित सोनी उन्हेल, लाभचंद मनोत, आदि महानुभावों ने अपने विचार व्यक्त किये। 

 jay nahar ratlam

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