रो रहा है भारत जिसे आजाद करने के लिए हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई ने अपना खून बहाया आज उसकी एकजुटता को एकता को बांटने का प्रयास हो रहा है।

स्वतंत्रता भारत में राष्ट्रवाद की बात अजीब सी लगती है।

क्या इस देश में रहने के लिए हिंदू होना जरूरी है ?

 क्या इस देश में नागरिकता पाने के लिए हिंदू होना काफी है ?


 जब हिंदू बौद्ध पारसी और इसाई सिखों को नागरिकता मिल सकती है तो मुस्लिम होना गुनाह है।


जिन सरकारों को चुनने के लिए सभी ने अपना बहुमूल्य मतदान दिया और बड़े-बड़े पदों में आसीन किया आज उसी से उससे नागरिकता पूछ रहे हैं। क्या आपका धर्म तय करेगा कि आप इस धरती में रहेंगे या नहीं

क्या इस धरती में रहने का अधिकार अब इस धरती में रहने वाले हुकूमत करने वाले हुक्मरान ते करेंगे?

क्या हुक्मरान इस धरती में रहने वाले इंसानों का भविष्य तय करेंगे

बहुत से सवाल है इन सवालों में उलझा हुआ इस देश का नगरीक 

 जबकि इंसानियत और इंसान होना ईश्वर का इनाम सबसे बड़ी उपलब्धि देन धरोहर है ।

ईश्वर ने इंसान को पैदा किया ताकि वह इस सृष्टि का सबसे श्रेष्ठ बनके और सृष्टि में रहने वाले हर एक इंसान का भला कर सके 

आज इंसान ही  इंसान का दुश्मन बन बैठा 

वक्ति हुकूमत ने दिमाग पागल कर दिया धर्म व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाने के लिए होता है।

 ना कि वह भेदभाव कर धरती में बसने वाले एक दूसरे इंसान को इस बात के लिए प्रताड़ित करें कि वह किसी और धर्म जाति या किसी और तरीके से अपने ईश्वर अल्लाह की पूजा आराधना करता है।

 इंसान का इस धरती पर इस मुल्क पर रहना इस बात पर तय नहीं होना चाहिए कि वह किस धर्म किस जाति और किस परिवार से आता है । बल्कि उसका इंसान होना काफी है ।

हिंदुस्तान सभी धर्मों के स्वतंत्र जीवन यापन करने की एक श्रेष्ठ धरती जगह देश माना जाता है। जिस देश का पूरी दुनिया में एक अलग स्थान है जो सभी धर्म जाति वर्गों के लोगों को स्वतंत्रता पूर्ण तरीके से जीवन यापन करने और अपने पूजा पद्धति धर्म को स्वतंत्रता पूर्व मानने की आजादी देता है।  इस मुल्क में कुछ पार्टियां जो कि देश की सेवा के लिए बनाई गई जिसे जनता ने ही चुना आज वह भेदभाव जाति धर्म समाज पर बांटने का कार्य कर रही है। और वह जाति धर्म के आधार पर इस मुल्क में नागरिकता देने या नागरिकता छीनने की बात कर रही है। यह इस देश के टूटने का और इस देश को बड़ी हानि की तरफ ले जाने का एक प्रयास नजर आ रहा है। देश में कौन बहुसंख्यक है कोन अल्पसंख्यक है यह   सुविधाएं दी जाएं और किससे छीना जाए ये सरकार तय करे  सरकार को तय करने देना सही नहीं है। आज एक जाति वर्ग को इस देश में सताने की कोशिश हो रही है। मुस्लिम अल्पसंख्यक के ऊपर एनआरसी सीएबी जैसे कानून लागू किए जा रहे हैं । जिसमें इस कानून के मापदंड में आने के लिए एक बड़े संघर्ष और दस्तावेज की आवश्यकता पड़ती है। उन दस्तावेजों को जुटाने के लिए लोग अपनी जान तक गवा देंगे इस बात को डिनाएं नहीं किया जा सकता कि दूसरे मुल्कों से लोगों ने आसरा के लिए पलायन कर हिंदुस्तान में रह रहे हैं । ऐसे में सी ऐ बी कानून लाकर नागरिकता देने की बात सरकार कर रही है।  जिसमें एक वर्ग छोड़कर सभी धर्मों को नागरिकता देने की बात सरकार कर रही है । मुस्लिम समुदाय से जो लोग आए हैं उन्हें बाहर करने की भी बात चल रही है। जबकि इस कानून को लागू करने में एक लंबा समय और एक लंबा प्रक्रिया लगने वाली है। जिससे देश में अफरा-तफरी का माहौल बनने की आशंका है। जबकि आज दिनांक तक के लिए अगर सभी को नागरिकता दी जाए और कुछ ऐसे लोगों को जिनसे देश को नुकसान हो सकता है। बाहर कर दिया जाए तो शांतिपूर्ण तरीके से देश के वातावरण अच्छा हो सकता है। इस कानून   के तहत मुस्लिम शरणार्थियों को भी नागरिकता  दी जानी चाहिए  या सभी के लिए एक सा कानून बनाना चाहिए इस पर विचार हो एन आर सी जैसे कानून से लाखों मुसलमान बेघर होंगे सरकार अभी CAB  लागू करेगी कैब के तहत जो गैर मुस्लिम शरणार्थी हैं उन्हें नागरिकता देगी और फिर एनआरसी लागू करके लाखों मुसलमानों को बेघर करेगी यह कैसा कानून है । जिससे मुस्लिम बनाम इंसानों को बेघर कर देने की योजना सरकार बना रही है। हम ऐसे कानून का विरोध करते हैं।


लेखक अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम 

Share To:

Post A Comment: