भाषाई  समझदारी का प्लेटफार्म शिल्प मेला

KKK न्यूज़ रिपोर्टर
          नैनी
     सुभाष चंद्र

 शिल्प मेला मे विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों और व्यापारियों में दिखा गजब का उत्साह

 प्रयागराज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एनसीजेडसीसी मैं लगा राष्ट्रीय शिल्प मेला केवल शिल्प कला और संस्कृति के संगम का नहीं बल्कि विभिन्न प्रांतों की भाषाई साझेदारी का भी अद्भुत प्लेटफार्म है लोक कलाकार के लिए यह आयोजन किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है मुक्ताकाश मंच पर सांस्कृतिक  कलाओं की साझेदारी तो स्टाल पर उत्पादों की खरीदारी के दौरान कलाकारों और शिल्पी को कभी अपने राज्य की भाषा को कभी हिंदी के टूटे-फूटे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए हंसते खिलखिलाते  देखा जा सकता है

एनसीजेडसीसी प्रयागराज वैसे तो 7 राज्यों का प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र है लेकिन यहां 1 दिसंबर से लगे राष्ट्रीय सिर्फ मेले में 15 से अधिक राज्य हिस्सेदारी कर रहे हैं उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश दिल्ली हरियाणा पंजाब उत्तराखंड बिहार राजस्थान मणिपुर उड़ीसा आसाम गुजरात छत्तीसगढ़ मिजोरम और मुंबई महाराष्ट्र के अलावा कश्मीर तमिलनाडु से भी कलाकारों और शिल्प कारीगरो व व्यापारियों का आगमन हुआ है इनमें अधिकांश शिल्पी 10 साल से अधिक समय से प्रयागराज आ रहे हैं इनमें कई राज्यों के लोगों का पहली बार तो कुछ का दोबारा या तीसरी बार मिलन हुआ ऐसे में उत्साह पूर्वक एक दूसरे से बात करने का मौका हर किसी के लिए सुनहरे पल लेकर आया है मेले में पटियाला पंजाब से जूतियां और चप्पले बेचने आए शिल्प व्यापारियों की दुकान पर असम से आई लोक कलाकार पहुंच गई फिर क्या था वही भाषाई आदान-प्रदान शुरू हो गया असम की कलाकारों ने अपनी भाषा में जिंसों के दाम पूछे व्यापारी हंसते हुए बोले कि वह आसामी नहीं जानते पटियाला वाले हैं हंसी धागों का माहौल बना फिर दोनों के बीच हिंदी में भी बातें शुरू हुई कुछ यही नजारा पश्चिमी छोर पर स्टाल लगाए कोलकाता के बेडशीट व्यापारी राजस्थान के जयपुर से आए कलाकारों के बीच दिखा इस साल पर पहुंचे ग्राहकों ने राजस्थान की क्षेत्रीय भाषा में बेडशीट के दाम ऊंचे तो व्यापारियों ने पहले उसी की भाषा में जवाब दिया फिर हिंदी जुबान में भी साझेदारी हुई।




Share To:

Post A Comment: