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         वन्दे श्री गुरु तारणम्

बाकल मे भब्य श्री पालकीं जी शोभायात्रा 

आज  श्री तारण तरण दिगम्बर जैन समाज बाकल सोलहवीं शताब्दी में अवतरित हुए महान आध्यात्मवादी क्रान्तिकारी संत आचार्य प्रवर श्रीमद् जिन तारण तरण मण्डलाचार्य जी महाराज की 571वी जन्म जयंती महोत्सव मनाई गई। सुबह मन्दिर विधी एंब  सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  कायृकम मे बाल वृम्हचारी बसंत जी महाराज ,विद्मानंद जी महाराज एवं पडित श्री महेश कुमार जी का सानिध्य प्राप्त हुआ ।

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तारण स्वामी ने अपने जीवन काल में चौदह ग्रंथों की रचना की।उन सभी ग्रंथों में उन्होंने सम्पूर्ण आगम का सार र्गभित कर दिया।भेदज्ञान,वस्तु व्यवस्था,तत्वनिर्णय  आदि को बताया

और जो सबसे महत्वपूर्ण "  तू स्वयं भगवान है " का सन्देश दिया।

तारण स्वामी के विचारों को सुनकर और उनकी आत्मसाधना,  वीतरागता को देखकर जब अन्य मतावलंबियो ने तारण पंथ अपनाना चाहा, तो उनके प्रमुख शिष्यों ने यह विधान बनाया कि जो भी सात व्यसन का त्याग, और आठ्ठारह क्रियाओ का पालन करेगा, वही तारण पंथी कहलायेंगे।🙏🙏🙏

तारण स्वामी की सार्थक जन्म जयंती महोत्सव तो तभी मना सकती है,जब हम उस समय के शिष्यों की तरह ही आज भी सहर्ष उन नियमों का पालन करें। जैनियों की जो मूल पहचान है। रात्रि भोजन त्याग और पानी छानकर पीने जैसे शुरुआती नियमों का पालन करे, जो कि अठ्ठारह क्रियाओ में शामिल हैं। सात व्यसनो का त्याग करें।हमारा लक्ष्य इस मनुष्य भव को जो असीम पुण्य के उदय से मिला है, सार्थक बनाना होना चाहिए।

गुरु महाराज की वाणी को अंतरंग से स्वीकार करें।कम से कम उन बातो को तो माने, जो हमारी पहचान है, ताकि आगे आने वाली पीढ़ी को विरासत में कुछ देकर जा सके।

विचार करके उस पर अमल भी करना होगा। यही हमारी सार्थक जन्म जयंती मनाने की पहल होगी।🙏🙏

तारण स्वामी का शुभ सन्देश तू स्वयं भगवान है।🙏🙏

🌹 नीलेश जैन बाकल🌹






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