'ग्रामीण' जी की स्मृति में हुआ कवि सम्मेलन 

योगेश योगी/कलयुग की कलम/ सतनाग्रामीण जी की जन्मस्थली ग्राम बाबूपुर में बघेली साहित्य के गौरव कहे जाने वाले देवीशरण ग्रामीण जी की स्मृति में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें सतना जिले के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता दर्ज की। कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ केपी तिवारी जी  एवं पद्मश्री बाबुलाल दाहिया जी रहे। कार्यक्रम का संचालन बालेन्द्र मिश्र जी ने किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ वीणापाणि के छायाचित्र पर माल्यापर्ण एवं वंदना से किया गया तत्पश्चात सभी साहित्यकारों ने ग्रामीण जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर काव्य पाठ की शुरुवात की। डॉ केपी त्रिपाठी जी की व्यंग रचना ' और सुना कस के रहा' ने खूब वाहवाही बटोरी, निर्मल सिंह की ग़ज़ल 'दो कुलों की सेतु होती हैं बेटियाँ' सुनाई, डॉ रामयश बागरी जी ने दोहे सुनाए, सतेंद्र पांडेय ने ओज की हुँकार भरकर श्रोताओं के मन मोहा, योगेश योगी किसान ने 'बोलो जय जवानों की पर भूलो न किसानों की' पढ़कर किसानों का दर्द साझा किया। पद्मश्री बाबु लाल दाहिया जी की बघेली रचना 'हम हर टाँकी कै टक टक मा गिरा पसीना देखी थे' ने शोषितों की आवाज बुलंद की। डॉ यु वी सिंह ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं को सुनाया। वरिष्ठ साहित्यकार बालेन्द्र मिश्र जी की रचना 'भूख लगती भी रही खाना खाया भी नहीं' ने हालातों को सोचने पर मजबूर कर दिया। तेजप्रताप तेज की रचना ' भाव कँहा से लाऊँ जिसमे रोली चंदन हो', बघेली रचनाकार रमेश सिह की रचना मनकहरी ने श्रोताओं को लोटपोट हो जाने पर मजबूर कर दिया। हास्य व्यंग्य रचनाकार रविशंकर चतुर्वेदी जी ने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को अडिग बना दिया 'यँहा कुछ भूखे पड़े उठान रहे कुछ हलुवा पूड़ी तान' सुनकर श्रोताओं ने तालियों का महोत्सव बना दिया। शैलेन्द्र सिह शैल की कविता 'बोए थे तुलसी के दाने गाजर घास उगे'समा बाँधा। इसके अलावा भी नरेन्द्र सैनिक, रमेश प्रताप सिंह जाखी, वरिष्ठ रचनाकार रामलाल सिह परिहार, केदार त्रिपाठी जी एवं अंत मे ग्रामीण जी की सुपुत्री इंदु सिह जी ने ग्रामीण जी की प्रसिद्ध 'धूल-ध्वनि' से अवतरित कविता "लाटा" पढ़कर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए। अन्त में ग्रामीण जी के पुत्र श्री पुष्कर सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। कविसम्मेलन को सुनने के लिए कृषि विभाग के एसडीओ ओपी तिवारी एवं सेमरवारा,परसवारा, पाकर,हड़हा,कोटा,नागौद, आदि के गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रोता उपस्थित रहे।



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