राग रतलामी/ गणतंत्र दिवस पर जिले को मिली धारा 144 से मुक्ति,जमकर मना जश्न

तुषार कोठारी

रतलाम। आज के दिन 71 साल पहले देश को अपना संविधान मिला था और जिले को आज के दिन धारा 144 से मुक्ति मिली। इसी का नतीजा था कि शहर की सड़कों पर संविधान पर्व का जश्न जमकर मना। चौराहों पर तिरंगा लहराया गया,तो कई सारी तिरंगा रैलियां भी निकाली गई। अफसर और बडे लोग पुलिस परेड ग्राउण्ड पर गणतंत्र दिवस मना रहे थे,तो गली मोहल्लों में सामान्य लोग अपने देश का गणतंत्र दिवस सैलीब्रेट कर रहे थे। शहर की सड़कों पर नन्हे बच्चें हाथों में तिरंगा लेकर घूम रहे थे।

भला हो बडी मैडम जी का,जो उन्हे गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले धारा 144 हटाना याद आ गया,वरना पिछले कई महीनों से पूरे जिले को धारा 144 से बान्ध कर रखा गया था। सरकार भी यही चाहती थी कि लोग बन्धे रहें,ताकि प्रशासन को मनमर्जी से कोई भी कार्रवाई करने का मौका उपलब्ध रहे। सीएए के विरोध और समर्थन के टाइम पर प्रशासन ने इसका भरपूर फायदा भी लिया।

प्रशासन को तो याद भी नहीं था,कि धारा 144 हटाना भी पडती है। किसी ने याद दिलाने की कोशिश भी की तो उसे भी डपट दिया गया। ये तो अच्छा हुआ कि अचानक 26 जनवरी आ गई और शहर के देशभक्त नागरिकों ने तिरंगा रैलियां निकालने की तैयारियां शुरु कर दी। इन लोगों को लगा था कि 26 जनवरी है,तो तिरंगा रैली निकालना उनका अधिकार है। लेकिन एक संस्था को वर्दी वालों ने साफ साफ कह दिया कि जिले में 144 लागू है और कोई रैली नहीं निकाली जा सकती,फिर वो चाहे तिरंगा रैली ही क्यों ना हो? ये झटका लोगों के लिए बडा भारी झटका था। प्रशासन के इस रवैये ने उन्हे अंग्रेजों की याद दिला दी,जिनकी गुलामी के दौर में तिरंगा रैली निकालना सबसे बडा गुनाह होता था। बस फिर क्या था। एक संगठन ने फौरन बयान जारी कर दिया कि प्रशासन अंग्रेजों वाला रवैया अपना रहा है। जैसे ही बडी मैडम को इस बयान की खबर मिली,उन्होने भी फौरन एक बयान दे दिया कि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई रोक नहीं है,लेकिन धारा 144 है,इसलिए रैली के लिए तो अनुमति लेना ही पडेगी। बिना अनुमति रैली निकाली तो सजा भी मिलेगी।

मामला गडबडा सकता था। लोग तो पंगा लेने को तैयार बैठे थे। अचानक बडी मैडम जी को समझ में आया कि राष्ट्रीय त्यौहार पर विवाद खडे करने की बजाय धारा 144 का बन्धन खोल देना ही उचित है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उधर महामहिम ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया और इधर मैडम जी ने धारा 144 हटाने की घोषणा कर डाली। इसी घोषणा का असर था कि पूरे शहर ने जोर शोर से गणतंत्र दिवस मनाया और तिरंगे हाथों में लेकर रैलियां भी निकाली।

घेराव किसने किया?

ब्यावरा की प्रशासनिक वीरांगना के अतिउत्साह ने फूल छाप पार्टी को पूरे सूबे में धमाल करने का मौका मिल गया। फूल छाप पार्टी ने पूरे प्रदेश के कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की घोषणा कर डाली। रतलाम के फूल छाप नेताओं ने भी इसके लिए जमकर तैयारियां की। फूल छाप वालों को उम्मीद थी कि सीएए समर्थन पर उमडी भीड जैसी भीड फिर से उमड जाएगी। उधर प्रशासन को भी यही अंदेशा था। नतीजा यह हुआ कि फूल छाप वालों के घेराव के पहले ही बडी मैडम जी ने पूरे कलेक्टोरेट का वर्दी वालों से घेराव करवा दिया। पूरी इमारत को चारों तरफ से बैरिकेट्स लगाकर पैक कर दिया गया और हर जगह वर्दी वाले तैनात हो गए।

इधर फूल छाप वालों की तमाम उम्मीदें धरी रह गई। उनके बुलावे पर इतने लोग भी नहीं आए,कि कलेक्टोरेट के एकाध कमरे का भी घेराव हो सके। फूल छाप वालों की इस दयनीय हालत को देखकर वर्दी वाले एक साहब भी कहने लगे कि थोडे और लोगों को तो बुलाओ।

बहरहाल,चार बडे चुने हुए नेता एक पूर्व मंत्री और कई बडे नेता,थोडे से कार्यकर्ताओं के साथ वहां पंहुचे। मैडम जी ने तो पहले से ही तगडे इंतजाम किए हुए थे,लेकिन जब उन्हे पता चला कि भीड नदारद है और सारे इंतजाम गैर जरुरी साबित हो चुके है,तो शायद उनका भी मूड बिगड गया। अब बारी थी ज्ञापन देने की। मैडम जी ने महकमें के एक अदने अफसर को भेज दिया। भाई लोगों ने ज्ञापन भी दे दिया। लेकिन यह बात पुराने दिग्गज को खटक गई तो वे भडक गए। उनकी नाराजगी के चलते थोडे बडे अफसर को आना पडा और पहले से दिए हुए ज्ञापन को दोबारा उन्हे दिया गया। सबकुछ निपटने के बाद अब लोग पूछ रहे है कि घेराव आखिर किसने किया था,फूल छाप वालों ने या वर्दी वालों ने?

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