नई दिल्ली. जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने मंगलवार को 28वें सेना प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया। 3 साल सेना प्रमुख रहे जनरल बिपिन रावत ने उन्हें चार्ज देने से पहले कहा कि आर्मी चीफ का काम कठिन होता है। उम्मीद है कि नरवणे यह जिम्मेदारी बखूबी निभाएंगे। इससे पहले जनरल रावत ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया गया है। वे बुधवार (1 जनवरी) को चार्ज लेंगे।सेना प्रमुख नरवणे ने कहा- पाकिस्तान ने प्रायोजित आतंकवाद बंद नहीं किया तो हम पहले ही खतरे की जड़ पर वार कर देंगे

जनरल रावत ने बतौर सेना प्रमुख आखिरी बार परेड की सलामी ली, उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने कहा कि कुछ काम अधूरे रह जाते हैं, नई जिम्मेदारी लेने के बाद योजनाएं बनाऊंगा। नॉर्दर्न, ईस्टर्न, वेस्टर्न और बर्फीले इलाकों में मोर्चे पर तैनात जवानों को शुभकामनाएं देता हूं। जो जान की परवाह किए बिना देश की सेवा में लगे हैं। वे अपने परिवार को छोड़कर सीमा पर तैनात रहते हैं। मुझे विश्वास है कि नरवणे अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाएंगे। आज खास मौका है। पिछले तीन सालों में मुझे सहयोग देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं। उनके कारण ही सफलतापूर्वक कार्यकाल पूरा कर पाया।

'सोच बड़ी रहती है, लेकिन कुछ काम अधूरे रह जाते हैं'

जनरल रावत ने कहा कि भारतीय सेना में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ एक पद है। इसको अपने कर्तव्य पालन में जवानों द्वारा सहयोग मिलता है। जिस टीम वर्क से सेना काम करती है, उसी से हमें सफलता मिलती है। विपिन रावत सिर्फ एक नाम है। मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता था। सोच तो हमेशा बड़ी होती है, लेकिन कुछ काम अधूरे रह जाते हैं। आगे के अधिकारी इन्हें आगे ले जाते हैं और यह उनकी जिम्मेदारी भी होती है। हथियारों का आधुनिकीकरण करना मेरी बड़ी सफलता रही है। यह कितना सफल हुआ, इसे बाहर से देखने वाला ही बता सकता है।

आज से जनरल नरवणे नए सेना प्रमुख नए सेना प्रमुख जनरल नरवणे इससे पहले 1 सितंबर 2019 को उप-थलसेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था। वे सेना की ईस्टर्न कमांड के प्रमुख भी रहे। 37 साल की सेवा में नरवणे जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में तैनात रह चुके हैं। वे कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इन्फैन्टियर ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं। नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी के छात्र रहे नरवणे को सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत किया जा चुका है। नरवणे ही वे आर्मी कमांडर हैं, जिन्होंने डोकलाम विवाद के दौरान चीन को हद बताई थी।

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