कल एमपीबीओए द्वारा एक बैठक की गई जिसमें सभी बैंक के अधिकारी मौजूद थे।

बैठक में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।

1. 8 जनवरी को होने वाली हड़ताल के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई जिसमें बताया गया कि यह हड़ताल मात्र बैंकिंग जगत ही नहीं पूरे केंद्रीय ट्रेड यूनियन द्वारा की जा रही है जिसमें सभी कर्मचारी, अधिकारी, मजदूर वर्ग शामिल होंगे।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचा जा रहा है और उनका निजीकरण किया जा रहा है। रक्षा उत्पादन, बैंक, बीमा, रेलवे, बंदरगाह और सड़क परिवहन, कोयला, बिजली, इस्पात, पेट्रोलियम - कोई भी क्षेत्र नहीं बख्शा है।

बैंकिंग क्षेत्र में, हम पाते हैं कि सरकार की निजीकरण नीति और बैंकों के विलय अनुचित है  जिसपर हमारा विरोध है।दूसरी ओर, वसूली का मुख्य मुद्दा कॉर्पोरेट ऋणों की उपेक्षा की जा रही है और जबकि कॉर्पोरेट्स को रियायतें दी जा रही हैं आम लोगों के लिए सेवा शुल्क बढ़ाया जाता है।

• श्रमिकों के राष्ट्रीय सम्मेलन की मांगों के चार्टर के समर्थन में

• बैंकिंग सुधारों और बैंकों के अनुचित विलय के खिलाफ

• निगम से डिफॉल्ट किए गए ऋणों की वसूली के लिए कड़े उपायों की मांग करना

• शीघ्र वेतन संशोधन और संबंधित मुद्दे

• बैंकों में पर्याप्त भर्ती

बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए वेतन संशोधन की हमारी जायज मांग को अनुचित रूप से लंबित किया जा रहा है। अप्रैल, 2010 के बाद भर्ती किए गए कर्मचारी परिभाषित पेंशन लाभ से वंचित हैं।हमारी सरकार द्वारा 5 दिन की बैंकिंग जैसी वास्तविक मांगों को अनदेखा किया जा रहा है।कर्मचारी और अधिकारी भारी कार्यभार से पीड़ित हैं और बैंकों में पर्याप्त भर्ती नहीं की जा रही है। इसी तरह आरबीआई, कोऑपरेटिव बैंक, आरआरबी, नाबार्ड, आईडीबीआई बैंक आदि पर सरकार द्वारा को हमले किए जा रहे है उनका कड़ा विरोध करते है।

2. वेतन समझौते पर विस्तृत चर्चा की गई। जिसमे बताया गया कि जल्द ही वेतन समझौते होने की संभावना है जिसमें 5 डे बैंकिंग मुख्य मुद्दा है जो के पूर्ण या आंशिक रूप से मान लिया जाना चाहिए। PLI स्कीम लागू की जाएगी जी के बैंक के ग्रॉस प्रॉफिट पर दिया जाएगा। 5 डे लीव एंकैशमेंट प्रति वर्ष मिलेंगी जो मौजूदा छुट्टियों के अलावा होगी। बढ़ोतरी के संबंध में स्पष्ट नहीं किया गया क्यूंकि उसमे अभी कुछ प्रतिशत बड़ने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।

3. एमपीबीओए द्वारा एक वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा जिसमें ड्यू डिलिजेंस, डॉक्यूमेंटेशन एवम् बैंकिंग के दैनिक कार्य में रखने वाली साधनियो पर प्रकाश डाला जाएगा और बैंक द्वारा जारी चार्जशीट, मेमो इत्यादि के निपटान एवम् उत्तर देने सबंधी शैली बताई जाएंगी ताकि हम अपने निर्दोष साथी अधिकारी को बचा सकें। हर बैंक में इस प्रकार के मुद्दों के लिए डिफेंस रिप्रेजेंटेटिव को नियुक्त किया जाता है जो पीड़ित अधिकारी की ओर से प्रबंधन को जवाब देता है। उपरोक्त कार्यशाला मुख्य रूप से अधिकारियों में डिफेंस रिप्रेजेंटेटिव की संभावनाओं को बढ़ाना है। हमारी बैंक से न्यूनतम पांच अधिकारियों को नामित किया जा सकता है इच्छुक अधिकारी संपर्क करे ताकि हम अपनी बैंक से ज्यादा से ज्यादा अधिकारियों कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करवा सकें।

हमारे द्वारा यूनिफॉर्म बैंकिंग टाइम के संदर्भ में एमपीबीओए को सूचित किया गया की आईडीबीआई बैंक को इसके बाहर क्यों लिया जा रहा जबकि अन्य कई राज्यो में हमारी बैंक इसके अन्तर्गत रखा गया है। एमपीबीओए द्वारा हमें आश्वस्त किया गया है कि वे अपने एसएलबीसी के कोऑर्डिनेटर से संपर्क कर सएलबीसी को पत्र लिख कर इसका निराकरण करेंगें।

उपरोक्त बिंदुओं के अनुसार हमें एकजुट रहकर हमें अपनी एवम् सारे बैंकिंग एवम् अन्य उपक्रमों के अधिकारी कर्मचारियों के हितों के लिए निजी हितों को एक ओर कर डटकर समस्याओं का सामना करना होगा।

जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारी जवाबदारी है कि इस हड़ताल को सफल बनाएं एवम् 8 तारिक की हड़ताल में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल हों। 


अभिषेक श्रीवास
AIIDBIOA
मध्य प्रदेश इकाई
MPBOA,
सहायक सचिव

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