दिल में सवालों के तूफान है क्या छुपा है इस सारे बवाल में मैंने जब अपने दिमाग पर जोर लगाया तो कुछ अलग सा समझ में आया

देश में 130 करोड़ जनमानस निवास करते हैं जिसमें 18 परसेंट मुस्लिम बनाम अल्पसंख्यक रहते हैं।

सोचा कि क्या अट्ठारह प्रेसिडेंट अल्पसंख्यक ही गरीब बेरोजगार असहाय  अक्षर रूडवादी आतंकवादी उग्रवादी है|

 देश के लिए खतरा है या कोई और बात है इस सारे अफरातफरी के माहौल को बनाने के लिए।

जब धरातल में पहुंचे तो जाना बात NRC.CAA.NPR की नहीं कुछ और ही है।

 जिनकी संख्या ज्यादा वह परेशान ज्यादा उनकी आवश्यकता  ज्यादा उनकी मांग ज्यादा और उनके सवाल ज्यादा सारे सवालों को दावाने के लिए बनती हैं ऐसी योजनाएं?

फिर मैंने अपने आप से सवाल किये सवाल के कुछ अंश मैं लिख रहा हूं आप भी विचार करिये और अपने आप को एक सटीक फैसले पर लाइए

जब मुसलमान 18 परसेंट ही है देश में तो क्या सब गरीब है। सब बेरोजगार हैं। सब अनपढ़ हैं ।सब भीखरी है  सब भुमीहीन हैं ऐसा तो नहीं है। 

अगर घुसपैठिए कुछ हजार कुछ लाख ही है तो पूरे 130 करोड़ देशवासियों को लाइन में खड़ा करना कहां तक सही है।

1 जब देश में सबसे ज्यादा बहुसंख्यक गैर मुस्लिम हैं तो आवश्यकताएं ज्यादा किसकी?

2 जब देश में सबसे ज्यादा बहुसंख्यक गैर मुस्लिम हैं तो बेरोजगार सबसे ज्यादा कौन?

3 जब देश में सबसे ज्यादा बहुसंख्यक गैर मुस्लिम हैं तो सबसे ज्यादा अशिक्षित कौन?

3 जब  देश में सबसे ज्यादा बहुसंख्यक गैर मुस्लिम हैं तो सबसे ज्यादा स्वास्थ्य विवस्था की आवश्यकता किसको?

4 जब देश में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम बहुसंख्यक हैं तो जमीन की आवश्यकता सबसे ज्यादा किस को

5 जब देश में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम बहुसंख्यक हैं तो सबसे ज्यादा सुरक्षा की आवश्यकता किसको?

6 जब देश में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम है तो सबसे ज्यादा गरीब कौन?

7 जब देश में सबसे ज्यादा गैर मुस्लिम है तो सड़कों में मंदिरों में मठों में ट्रेनों में बसों में स्टेशनों में सबसे ज्यादा भीखारी कौन ?

जब इन सवालों पर मंथन किया तब समझ में आया कि कहीं देश के 82% लोग अपने हक के लिए खड़े ना हो जाएं इसलिए 18% के ऊपर इस तरह की योजनाएं बनाई जा रही है।

18% लोग सड़क पर आकर सही बात के लिए आंदोलन करें और 82 परसेंट लोग अपने हक के लिए सोच भी ना पाए मतलब फार्मूला माइंड सेट

ताकि 18 परसेंट अपनी मांग को लेकर सड़क पर आ जाएं ध्यान देने योग्य बात है बेरोजगारी अर्थव्यवस्था शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी की बदहाल हालत से ध्यान हटाकर एक अलग हिंदू मुस्लिम जैसे पोपो गंडे से देश की गंगा जमुनी तहजीब को गंदा किया जा रहा है।

 समर्थन दे रहे जनमानस आपस में ही लड़ते झगड़ते रहे तो देश तरक्की से हटकर एक बड़ी गिरावट की ओर चल पड़ेगा और एक आदमी गरीब फकीर लाचार होकर हाथ में कंठी माला दाढ़ी टोपी लेकर बाकी रहेगा देश को विकास सील बनाने के नाम पर कंगाली हाथ लगने वाली चतुर बनो अपने हक के लिए लड़ो नहीं तो देश चल पड़ा है गुलामी की ओर

यह मुल्क सब का है और इसमें मुल्क की तरक्की और गिरावट सबकी तरक्की और गिरावट है। इसलिए सब एक होकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाएं और सरकारों को उसके मुद्दे पर लाएं कि वह देश को विकासशील बनाएं बेरोजगारी खत्म करें शिक्षा का स्तर सुधारें स्वास्थ्य व्यवस्था सही करें कानून व्यवस्था सुधारी जाए बिजली और पानी की सुविधाएं बेहतर हो बेरोजगारी का खात्मा हो और इस तरीके की कोई भी योजनाएं देश में लागू ना हो सके ऐसा प्रयास सब मिलकर करें

लेखक:- अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम 

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