हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी के प्राचार्यों की बैठक मैं बोले कलेक्टर बोर्ड परीक्षा के परिणाम सुधारने लगातार प्रयास करें

कलयुग की कलम ग्रामीण रिपोर्टर कटनी -

कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने जिले के हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यों को बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सुधारने लगातार प्रयास करने के निर्देश दिये हैं। शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माधवनगर के सभाकक्ष में जिलेभर के प्राचार्यों की बैठक लेकर कलेक्टर ने कक्षा 10वीं और 12वीं के त्रैमासिक परीक्षा और अर्धवार्षिक परीक्षा परिणामों की विद्यालयवार तुलनात्मक समीक्षा की। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी बी0बी0 दुबे, प्राचार्य विभाग श्रीवास्तव, एपीसी अभय जैन, स्मार्ट क्लास प्रभारी मुकेश द्विवेदी भी उपस्थित थे।

कलेक्टर श्री सिंह ने मिशन थाउजेण्ड में शामिल 28 विद्यालयों सहित जिले के सभी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के प्राचार्यों से त्रैमासिक और अर्धवार्षिक परीक्षा परिणामों में हुये सुधार और परिवर्तन की जानकारी ली। उन्होने कहा कि प्राचार्य और शिक्षकों की परफॉर्मेन्स बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर मूल्यांकन किया जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारी बी0बी0 दुबे ने बताया कि वर्ष 2019-20 में कक्षा 10वीं का त्रैमासिक परिणाम बहोरीबंद में 45 प्रतिशत, कटनी में 40 प्रतिशत, बड़वारा में 37, रीठी में 38, विजयराघवगढ़ में 34 और ढीमरखेड़ा में 46 प्रतिशत रहा है। सम्पूर्ण जिले की औसत त्रैमासिक परिणाम 40 प्रतिशत है। परीक्षा परिणाम सुधारने की कवायद में विकासखण्डवार स्कूलों की कक्षा 10वीं का अर्धवार्षिक परिणाम बहोरीबंद 60 प्रतिशत, कटनी 53 प्रतिशत, बड़वारा 50, रीठी 56, विजयराघवगढ़ 51 और ढीमरखेड़ा 55 प्रतिशत मिलाकर जिले का औसत अर्धवार्षिक परिणाम 54 प्रतिशत रहा है।

मिशन 1000 के 28 विद्यालयों में गर्ल्स एक्सीलेन्स स्कूल कटनी और गर्ल्स स्कूल जोबीकला को छोड़कर सभी 26 विद्यालयों में कक्षा 10वीं के अर्धवार्षिक परीक्षा परिणामों में त्रैमासिक परिणामों से वृद्धि दर्ज की गई है। मिशन 1000 के 28 विद्यालयों में से कक्षा 12वीं में सभी का अर्धवार्शिक परिणाम 50 प्रतिशत से अधिक रहा है। किन्तु 17 विद्यालयों में त्रैमासिक परिणाम की तुलना में कमी परिलक्षित हुई है। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि सुनिश्चित करें कि बोर्ड की परीक्षाओं में जिले का परिणाम 50 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिये। उन्होने कहा कि शासन द्वारा स्मार्ट क्लास सहित सभी योजनाओं और कार्यक्रमों का एक उद्देश्य यह है कि बच्चों का रिजल्ट बेहतर होना चाहिये। रिजल्ट में सुधार लाने के निरन्तर प्रयास जारी रहें। परीक्षा सम्पन्न होने तक शैक्षणिक स्टाफ को अवकाश प्रतिबंधित करें। प्राईवेट स्कूलों की तर्ज पर छात्रों का साप्ताहिक टेस्ट लेकर मूल्यांकन करें। विषय विशेष में कमजोर छात्रों को एक्स्ट्रा क्लास या रेमीडियल क्लास की कक्षायें दें। बच्चों की स्कूल में उपस्थिति मुख्य तत्व है। रिजल्ट सुधार और समुचित पठन पाठन का गतिविधि के सुचारु संचालन में बीईओ, बीआरसी की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी स्कूलों का निरन्तर भ्रमण करें और कक्षायें भी लें। जिन स्कूलों में अतिथि शिक्षक नहीं हैं या विषय शिक्षक नहीं हैं, उन स्कूलों में जिले के अन्य अधिकारी और शिक्षा अधिकारी कक्षायें लें। कलेक्टर ने अर्धवार्षिक परीक्षा में अच्छा रिजल्ट देने वाले और खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के प्राचार्यों से बात-चीत कर प्रयासों और कठिनाईयों की जानकारी ली। उन्होने मेरी शाला-मेरी जिम्मेदारी नवाचार के तहत विद्यालय में किये गये कार्यों और प्रयासों की जानकारी ली।


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