बैंकों की दरकती छवि

आज समाज के किसी भी वर्ग से चर्चा करें ,बैंक की नकारात्मक छवि ही उभरकर सामने आ रही है।

क्यों गुजरात हाई कोर्ट बैंकों की हड़ताल के विरुद्ध आदेश देने के लिये उतारू हो जाता है? ऐसी कौन ही हड़ताल है जिससे काम रुकने के बजाय तेजी से होने लगे? यदि हड़ताल,धरना समाज के लिये घातक हैं तो क्यों ना सारे राजनैतिक दल हड़ताल धरना ना करने के लिये वचनबद्ध हो?कहीं यह न्यायालय के माध्यम से ट्रेड यूनियन के विरोध के मूल अधिकारों को खत्म करने की साजिश के कदमों की आहट तो नहीं है?

उधर अंग्रेजी अखबार बैंकों के विरुद्ध जहर उगला रहे हैं, असलियत को दरकिनार कर आंकड़ों के आधार पर बैंकों को नकारा सिद्ध करने पर तुले हैं। कांच के वातानुकूलित केबिन में महानगर के आसमान को निहारते ये टाईवाले आर्थिक पत्रकार कभी गोबर में सनी गांव की पगडंडियों में वसूली के लिये मैनेजर की मोटरसायकल पर कड़ी धूप,बरसते पानी याकि जाड़े की ठंड में कोहरे में डूबे दिनों में चार दिन घूम लें, महीनेभर अस्पताल के पलंग से ना उठ पायेंगे। 

ये जो छुटभैये नेता मुंह उठाये चले आते हैं, नगरपालिका का कर्मचारी इन्हें इसी मुंह पर टकासा जवाब दे देता है। शहर की सड़कें हो या नालियां इनकी तीन पीढियां सुधरवा नहीं सकी, बैंक में अपना अधूरा ज्ञान पेलने चले आयेंगे। 

लोन चाहिये साहब,ये जो डिग्री की तख्तियां लटकाये अनपढ़ युवाओं की फौज को बैंक के माथे धकेल दिया है,यह लालफीताशाहीयो की बदमाशी है,दस के लक्ष्य के विरुद्ध सौ आधे अधूरे प्रकरण भेजना फिर बेरोजगारों को मासूमियत से बताना बैंकवाला लोन  नहीं कर रहा क्या करें?

सारे विभागों से सारी योजनाएं समेट कर बैंकों के सर पटक दी,छात्रवृत्ति बैंक से,वेतन बैंक से, पेंशन बैंक से,अनुदान बैंक से,बीमा बैंक से भाई मेरे बैंकवाले निक्कमे है,कामचोर हैं तो अपने विभागों को वापस इन कार्यों हेतु अधिकृत करें,पता है कितना अंधेरा है अपने ही दीपकों के तले, लेकिन उसका जिक्र कहीं नहीं होगा मेरे मुल्क के मालिकों।

गरीब की जोरू है बैंक, सहायक महाप्रबंधक स्तर के कार्यपालक को महाकौशल में तीसरे स्तर का अधिकारी धमकी देकर चला गया। बैंकिंग उद्योग छोड़िये, उनके कार्यालय में ही कोई हलचल नहीं हुई, हम कब तक निर्लज्जता से अपमान सहते रहेंगे। राजस्थान में ग्रामीण हेल्थ सेंटर के जूनियर डॉक्टर से तीसरे स्तर के अधिकारी ने ऊंची आवाज में बात की सारा स्वास्थ्य अमला सड़क पर आ गया। हम सिर झुकाए  बेइज्जती सहने के अभ्यस्त हो गये हैं।

हमारा पक्ष दृढ़ता से हर फोरम पर सतत रखना होगा, बिना एकजुटता के अपना पुराना सम्मान कभी नहीं पा सकेंगे,दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय दूसरों की ओर दोस्ती का,दृढ़ता का,एकता का हाथ बढायें। भूल जाएं कल क्या हुआ था,याद रखें खतरा आनेवाले कल में है....

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