मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जनसंपर्क विभाग को  पूरी तरह से अपने पास नही रखा है उन्होंने राजधानी से लोकल का एक मंत्री अटेज किया है तभी ही से जनसंपर्क विभाग के हालत बद से बदतर हो गए,ऊपर से प्रिंट मीडिया पर दमनकारी नीतिया लादी जा रही है साथ ही विज्ञापन और भुगतान के नाम पर छोटे व मझोले अख़बार वालो बेवजह परेशान किया जा रहा है इस विभाग मे स्थिति इतनी विकराल हो गई है सब अपनी जिम्मेदारियों से मुँह छुपा रहे है ! जबकि इसी विभाग के लिए पांच मंत्रियो की एक कमेटी भी बनी है ,प्रमुख सचिव, आयुक्त,और संचालक सहित तीन तीन ias अधिकारी तैनात है, अपर संचालक (विज्ञापन),उप संचालक (विज्ञापन) औऱ 4 बाबू भी विज्ञापन का काम देखते है ! इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार रवींद्र बड़गैया और कॉंग्रेस मीडिया प्रभारी शोभा ओझा का भी हस्तक्षेप है !*

मध्यप्रदेश के 56 विभागो में से सिर्फ़ जनसंपर्क विभाग ही ऐसा विभाग है जो सबकी आखों में खटक रहा है इस विभाग में छांट छांट कर रिश्वतखोरो का जमावड़ा कर दिया है ! 

आपको बता दे कि मध्यप्रदेश के जनसंपर्क संचालनालय में विज्ञापनो की बंदरबाट मिलीभगत हो रही है।षड्यंत्रकारी ज़िम्मेदारो ने मीडिया को दो भागो में बाटकर रख दिया है राज्य दर एवं डीएवीपी! 

DAVP का सीधा सम्बन्ध दिल्ली है औऱ राज्य दर का मध्यप्रदेश से इस समय दिल्ली डीएवीपी ऑफीस में मोदी सरकार का वर्चस्व है ! जनसंपर्क आयुक्त पी.नरहरि भाजपा शासनकाल में भी जनसंपर्क आयुक्त थे औऱ अब कॉंग्रेस शासनकाल में भी जनसंपर्क आयुक्त है पर इनकी कार्यप्रणाली से प्रदेश सरकार की छवि पर गेहरा असर पड़ रहा है, कमीशन के खेल मे मध्यप्रदेश के विभिन ज़िलों से निकलने वाले साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक सहित छोटे, मझोले दैनिक अखबारों के विज्ञापन बंद करने जैसी स्थिति पैदा कर दी है ! *जबकि davp के नाम पर भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश के आगरा, इलाहाबाद,अलीगढ़ , बनारस, बरेली , झांसी , कानपुर , लखनऊ , मेरठ मुरादाबाद गोरखपुर तथा हिसार, हरियाणा औऱ देहरादून , उतराखंड एवं कई अन्य प्रदेशो से निकलने वाले अखबारो को कमीशन की शर्त पर जमकर प्रदर्शन विज्ञापन दिये जा रहे है !* नवम्बर, दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 में मध्यप्रदेश के बाहर के अखबारों को लगभग 06 लाख sq.cm के विज्ञापन दिये गए है जिसकी राशि करोड़ो में है ! मुख्यमंत्री कमलनाथ को अंधेरे में रखकर करोड़ो रुपए प्रदेश के बाहर फूजूल खर्च किये जा रहे है ! क्योकि यही विज्ञापन अगर मप्र के गली, मोहल्लो से निकलने वाले अखबारों में प्रकाशित होता तो मप्र की जनता औऱ मतदाता तक पहुंचता, जिसका सीधा लाभ प्रदेश सरकार को होता पर , सिर्फ़ मोटे कमीशन की लालच में कमलनाथ सरकार का पैसा पानी की तरह बहा रहे है ! जबकि प्रदेश के बाहर के डीएवीपी अखबार मोदी सरकार की उपलब्धियों को प्राथमिकता से प्रकाशित करते है ! कमलनाथ सरकार की नही ! 

जनसंपर्क में कमीशन सेना

षड्यंत्रकारी ने बाकायदा अपनी सेना तैयार की है, ये सेना विज्ञापन देने में कमीशन लेती है औऱ इसी विज्ञापन का भुगतान करने में भी कमीशन लेती है ! अख़बार वाले विज्ञापन लेने औऱ भुगतान लेने में दो दो जगह कमीशन देकर लूट रहे है जो अख़बार वाला कमीशन देने में असमर्थ है उसे विज्ञापन नही दिये जा रहे है  इसके अलावा ये सेना राज्य दर के अखबारो को बंद करने का षड़यंत्र भी रच रही है, औऱ इसका ठीकरा कमलनाथ सरकार पर फोड़ रही है,बाकायदा पत्रकारों को उकसाया जा रहा है इतना ही नही मुख्यमंत्री कमलनाथ की छवि को भी मटियामेट किया जा रहा है !

जनसंपर्क में भ्रष्टाचार करने की खुली छूट

भ्रष्टाचारियों ने विज्ञापन शाखा , बिल शाखा, सत्कार शाखा औऱ क्षेत्र प्रचार शाखा को अपने संरक्षण ले रखा है औऱ भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे रखी है बदले में इन शाखाओं से भरपूर कमीशन प्राप्त कर रहे है ! इसी कारण इन शाखाओं पदस्थ भ्रष्ट अधिकारी औऱ बाबू सीना तानकर कमीशन की मांग करते है ! 

pmja लोकायुक्त से करेगा शिक़ायत

जनसंपर्क संचालनालय के विज्ञापन शाखा के अधिकारियों ने पिछले एक वर्ष से विज्ञापनो मे जमकर बंदरबाट कर लाखो/करोड़ो का कमीशन प्राप्त किया है जिसकी शिक़ायत प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसियेशन (pmja) के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज़ भारतीय इस सप्ताह लोकायुक्त से करेंगे ! 

बजट का 50%प्रतिशत लघु समाचार पत्रों पर ख़र्च करने का है प्रावधान! 

पीएमजेए अध्यक्ष परवेज़ भारतीय ने कहा प्रदेश सरकार की जनकल्याकारी योजनाओ के प्रचार प्रसार के लिए जनसंपर्क विभाग विज्ञापन जारी करता है इसके लिए बाकायदा सरकार बजट उपलब्ध कराती है इस बजट का 50%प्रतिशत लघु समाचार पत्रों पर ख़र्च करने का प्रावधान है !

अभी तक की प्रदेश सरकारो मे जनसंपर्क विभाग इस नियम का पालन करता रहा है पर मध्यप्रदेश मे कॉंग्रेस की सरकार बनाने के बाद जनसंपर्क संचालनालय  के कमीशनबाज़ अधिकारियों ने इस नियम को तार तार किया है इस नियम को तोड़कर मुख्यमंत्री कमलनाथ की छवि को बदनाम किया जा रहा है !

लघु समाचार पत्रों की क्षेणी मे आने वाले साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक एवं छोटे दैनिक शामिल है इनको छोटे एवं मझोले भी कहा जाता है इन समाचार पत्रों ने ही आज़ादी की लड़ाई मे महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था ! कॉंग्रेस की कमलनाथ सरकार इन लघु समाचार पत्रों की हत्या करने पर तुली हुई है !म प्र स्थापना दिवस और राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर भी इन लघु समाचार पत्रों को विज्ञापनो से मेहरूम रखा, इतना ही नही प्रदेश सरकार इन लघु समाचार पत्र, पत्रिकाओं का पूर्व का भुगतान भी अटकाए हुए है !

समय समय पर जारी होने अनुमोदित सूची के दैनिक समाचार पत्रों के विज्ञापनो पर भी कमीशनबाज़ अधिकारियों की लालची नज़र रहती है ! हर छोटा बड़ा जारी होने वाला विज्ञापन का इन विज्ञापन शाखा के कमीशनबाज़ अधिकारियों को नगद कमीशन चाहिए होता है ! तब ही विज्ञापन दिया जाता है , जो अख़बार वाला कमीशन देने मे असमर्थ है उसे विज्ञापन नही दिया जाता ! कुछ चुनिंदा अख़बारो को ही मोटा विज्ञापन दिया जा रहा है !

एलेक्ज़ेंडर वाँन

प्रदेश संयोजक 

प्रिंट मीडिया जर्नलिस्ट एसोसियेशन(pmja)

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