देश की पहली ट्रांसजेंडर न्यूज़ एंकर हैं पद्मिनी प्रकाश, सामाज कल्याण के लिए उठा रही हैं कदम

तमिलनाडू की रहने वाली पद्मिनी प्रकाश ने साल 2014 में अपनी किस्मत पूरी तरह से बदल दी। पद्मिनी ने लोटस न्यूज़ चैनल में सात बजे आने वाले प्रोग्राम में न्यूज़ एंकरिंग कर देश की पहली ट्रांसजेड़र न्यूज़ एंकर बनने का इतिहास रचा था। समाज की ट्रांसजेंडरों के प्रति हीन सोच होने के कारण उन्होंने बचपन से ही कई सारी प्रताड़नाओं का सामना किया है। थक हार कर जब पद्मिनी ने सुसाइड करके अपनी जिंदगी को खत्म करने का सोचा तो उन्हें बचाकर एक नई जिंदगी दी गई। पद्मिनी ने ना केवल खुदको अपनाया बल्कि उन्होंने देश के सामने एक मिसाल भी कायम कर दी है। आइए जानते हैं पद्मिनी का प्रेरणादायक सफर...

ट्रांसजेंडर होने के कारण परिवार ने ठुकराया

पद्मिनी बचपन से ही देखने और बोलने में बाकी बच्चों से काफी अलग थीं। जब घरवालों को उनके ट्रांसजेंडर होने का अंदाज़ा हुआ तो उनपर कई सारी पाबंदियां लगा दी गईं। समाज के डर से घरवालों ने उन्हें स्कूल भेज़ने से इनकार कर, बाकी बच्चों के साथ खेलने और बाहर लोगों से मिलने पर भी रोक लगा दी गई थी। अपने घरवालों का ऐसा रवैया देखकर पद्मिनी को अपने अस्तित्व पर ही शर्म आने लगी जिसके बाद उन्होंने घर छोड़कर आत्महत्या करने की कोशिश तक की थी। 13 साल की उम्र में आत्महत्या की नाकाम कोशिश के बाद उनके दोस्तों के परिवार ने उनकी जिम्मेदारी लेने का फैसला किया।

ओपरेशन से बनीं हैं महिला, एक बच्चे को लिया है गोद

सुसाइड से बचने के बाद पद्मिनी को जिंदगी जीने की एक अलग चाह मिली, लेकिन परेशानियां और जिल्लतें उनके सामने बार-बार आती रहीं। पैसों की तंगी के कारण वो अपना ग्रेजुएशन तक पूरा नहीं कर पाईं। साल 2004 में उन्होंने अपना ओपरेशन करवाकर खुद को पूरी तरह महिला बना लिया। इसी साल उनकी शादी पुराने दोस्त नागराज प्रकाश के साथ हो गई, बाद में दोनों ने एक बेटे को गोद लेकर अपना परिवार पूरा कर लिया।

टीवी सीरियल में काम से पहले जीता ब्यूटी कोन्टेस्ट

पद्मिनी एक ट्रेंड क्लासिकल डांसर हैं, उन्होंने कई लोगों को भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दी है। कुछ तमिल टीवी सीरियल में बतौर एक्ट्रेस काम करने के अलावा पद्मिनी साल 2007 में मिस ट्रांसजेंडर तमिलनाडू और मिस ट्रांसजेंडर इंडिया 2009 भी बन चुकी हैं।  

ऐसे रच दिया इतिहास

जब साल 2014 में ट्रांसजेंडर्स को सुप्रीम कोर्ट द्वारा थर्ड जेंडर की मान्यता दी गई तो ट्रांसजेंडरों को नौकरी मिलनी शुरू हो गई थी। कोएंबटूर के लोटस न्यूज़ चैनल में शाम 7 बजे का शो होस्ट करने के लिए किसी ट्रांसजेंडर की ज़रुरत थी। नौकरी की तलाश में दर-दर भटक रहीं पद्मिनी ने इस नौकरी के लिए अर्जी दी। पहले तो उन्हें डर था कि समाज उनकी आ‌वाज़ और उनके अस्तित्व को स्वीकार करेगा या नहीं, मगर दो महीने की ट्रेनिंग के बाद सारे डरों को पीछे छोड़ पद्मिनी एक माहिर एंकर बन गईं। साल 2014 में स्वतंत्रता दिवस के दिन पद्मिनी ने पहली बार टेलीप्रॉम्पटर पर खबर पढ़ी थी जिस दिन के बाद वो देश की पहली ट्रांसजेंडर एंकर बनीं। उनके शो को दर्शकों का खूब प्यार मिला जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

नौकरी के बाद मिला सम्मान, आज भी समाज से कर रही हैं लड़ाई

पद्मिनी के हौसले से उन जैसे कई लोगों को नौकरी करने की प्रेरणा मिली है। उनके इस कदम की लोग खूब सराहना करते हैं। अब वो जहां भी जाती हैं लोग उन्हें पहचान कर उनसे ओटोग्राफ मांगते हैं जिससे पद्मिनी को काफी खुशी और सम्मान महसूस होता है। अपने बचपन में समाज द्वारा ठुकराए जाने के कारण पद्मिनी अब अपने जैसे ही लोगों की मदद का काम कर रही हैं। सरकार द्वारा थर्ड जैंडर की मान्यता मिलने के बावजूद समाज की सोच ट्रांसजेंडरों के लिए काफी अलग है। ऐसे में पद्मिनी थर्ड जेंडर के लोगों को उनके हक दिलाने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का काम कर रही हैं।

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