जहाँ एक और कॉलेज के संचालक संजय उपाध्याय का पेपर में बढ़िया विज्ञापन होता है।

पेपर में काफी तारीफ होती है,

लेकिन उसके अलावा उस कॉलेज में स्टाफ के साथ जो हो रहा है उस पर किसी का कोई ध्यान नही है। स्टाफ को समय पर वेतन नही दीए जाने की शिकायत लगातार स्टाफ के लोगो द्वारा की जाती रही है। लेकिन उस पर कोई ठोस कार्यवाही तो दूर पुलिस प्रशासन उस व्यक्ति (उपाध्याय) को बुलाकर आज तक उसके कथन बयान तक दर्ज नही कर पाया है, पहले सिर्फ एक महिला ने शिकायत की कोई उचित कार्यवाही नही हो पाई, जिसके बाद उस महिला द्वारा दुबारा शिकायत की गई थी कि उसके साथ कोर्ट परिसर रतलाम में उपाध्याय और उसके साथियों द्वारा अभद्र भाषा का उपयोग किया गया जिसकी शिकायत करने के बाद भी कोई उचित कार्यवाही से महिला के अनुसार उसे न्याय से वंचित रखा गया, उसके उपरांत दूसरी महिला द्वारा भी शिकायत की गई पुलिस द्वारा कहा गया कि सेलेरी मेटर है हम हेल्प नही कर सकते, ऐसे में कई सवाल सामने आ रहे है कि क्या सभी स्टाफ के लोग झूठ बोल रहे है।

कॉलेज परिसर में सफाई से लेकर अन्य सारे कार्य लगभग सारे कार्य यूनिवर्सिटी के मापदंड के अनुरूप नही है।। जिसकी शिकायत भी अध्यापिका द्वारा अलग अलग संबंधित विभाग में कई गई है।

आखिर क्या कारण है कि उसके बावजुद भी कोई कार्यवाही नही की जा रही है और दूसरी और उपध्याय के अलग अलग पेपर में विज्ञापन में उनको एक मसीहा और शहर का सबसे उच्च इज्जतदार व्यक्ति बताया जा रहा है।

क्या किसी पेपर ने उसकी व्यक्तिगत जीवन के अलावा सामाजिक जीवनी और कार्य क्षेत्र के बारे में कोई बात या जानकारी प्राप्त की गई है।

  जिला ब्यूरो चीफ
 एलाज खान रतलाम





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