खुला -पत्र प्रधानमंत्री जी के नाम

कलयुग की कलम 

“प्रधानमंत्री

 लॉकडाउन के बाद निर्मित परिस्थितियों पर पुन: विचार करके  निर्णय करे”

“लॉंकडाउन देश की आत्महत्या साबित न हो जाये

पुन:विचार करे”

म.प्र. कॉंग्रेस कमेटी के प्रदेशसचिव राकेश सिंह यादव ने प्रधानमंत्री से पत्र लिखकर निवेदन किया हैं की,

उल्लेखित विषय में विशेष आग्रह  हैं की कोरोना के प्रभाव को कम करने के लिए हमारा देश लगातार विदेशों में WHO  ने जो सलाह लॉकडाउन करने की दी हैं इसी सलाह का हमारा देश भी अनुसरण कर रहा हैं।निश्चित तौर पर पूर्व में सावधानीयो बरतने में गलती हुई हैं।लेकिन लॉकडाउन के बाद कोरोना के ज़्यादा मामले आये हैं ।

विदेशों में कोरोना का ज़्यादा असर वहॉं के वातावरण एंव अनुवांशिक कारण हो सकते हैं।लेकिन हमारे देश में आज भी कोरोना का असर ज़्यादा प्रभावी नहीं हैं।जबकि हमारी आबादी 135 करोड़ हैं।इसका सीधा मतलब हैं की लॉकडाउन देश के लिए सभी स्तर पर हानिकारक सिद्ध हो रहा हैं।

विशेषज्ञों के अपने तथ्य विदेशों के ऑंकडो से प्रभावित हैं जो की वास्तविक के धरातल से कोसो दूर हैं।

हमें देशहित में लॉकडाउन एंव कोरोना संक्रमण को लेकर नये सिरे से योजना बनाना चाहिए।

इस योजना के अन्तर्गत कोरोना संक्रमण से प्रभावित एंव संपर्क में आये लोगों को शहर के बाहर अस्थायी अस्पताल निर्मित बिल्डिंगो  में बनाकर ईलाज करना चाहिए।जिससे जनता का विश्वास भी लौटेगा एंव जनता सहयोग भी प्राप्त रहेगा कोरोना से मुक़ाबला करने में।

वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस का उपयोग करके कोरोना से संक्रमित व्यक्तियों को इलाज के लिए ढूँढा जा रहा हैं।इस तरह से कार्य करने का तरीक़ा अराजकता बढा रहा हैं।

सामान्य ज्ञान की बात हैं की कोरोना सिर्फ़ संक्रमित व्यक्ति के संपर्क आने पर ही फैलता हैं तो क्या हमारे देश में संक्रमित 1100 लोग और संभावित 35000 लोगों को अलग करके कोरोना को नहीं रोक सकते।यह तरीक़ा ज़्यादा कारगार सिद्ध होगा।

समय रहते विचार करना अतिआवश्यक हैं कही ऐसा न हो की कुदरत भूल सुधारने का मौक़ा भी न दे।

लॉकडाउन का मतलब होता हैं सोशल सम्पर्क में नहीं रहना यह विदेशों में निश्चित तौर पर लाभदायक रहा हैं क्योंकि वहॉं एक घर में औसतन तीन लोग रहते हैं घर के क्षेत्रफल बड़े होते हैं तथा एक घर से दूसरे घर में दूरी होती हैं लेकिन हमारे देश की परिस्थितियॉं ठीक इसके विपरीत हैं यहाँ सारे घर एक दुसरे से लगे हुए हैं एक घर में औसतन छह से सात लोग रहते हैं महानगरों में तो एक कमरे किचन में आठ लोग तक रहते हैं।अब आप सोचें लॉकडाउन का पालन कैसे संभव हैं।सिर्फ़ घर में रोकने से लॉकडाउन का मक़सद हल नहीं होता हैं।इससे ये गंभीर बीमारी बड़ा विकराल रूप धारण कर सकती हैं।

ये ज़रूरी नहीं हैं की विशेषज्ञों एंव किताबों का ज्ञान हमारे देश में सही साबित हो।कभी कभी परिस्थितियों को देखकर भी निर्णय लिये जाते हैं। क्योंकि जब से लॉकडाउन हुआ हैं लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा हैं एंव मरीज़ों की संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा हैं।

जब देश में प्रयोगों का दौर चल ही रहा हैं तो एक प्रयोग यह  भी किया जाना चाहिए क्योंकि मक़सद तो देश के लोगों की जान बचाना हैं।हमारी जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार अभी कोरोना का असर इटली या अन्य देशों के मुक़ाबले बहुत कम हैं मृत्युदर भी बहुत कम हैं।लोग ठीक हो रहे हैं।लेकिन यह लॉकडाउन परिस्थिति बिगाड़ रहा हैं।आर्थिक नुक़सान के साथ ही कोरोना फैल रहा हैं क्योंकि अब कोरोना पीड़ित ईलाज कराने के जगह बीमारी छुपाने का कार्य कर रहे हैं जो की आने वाले ख़तरे की चेतावनी हैं।वक़्त रहते अगर हमने पुन:विचार नहीं किया तो निश्चित हम महामारी की चपेट में आ जायेगे।

सामान्य सी बात हैं की कोरोना के अधिकतम पीड़ितों की संख्या बिना सरकारी ऑंकडो के मान भी लें तो लगभग संक्रमित एंव संभावित संक्रमित पचास हज़ार से ज़्यादा नहीं हैं।अब इन पचास हज़ार लोगों को अलग करके संक्रमण रोकना ज़्यादा आसान हैं या फिर सारे देश को घरों में बंधक बनाकर 135 करोड़ लोगों को पचास हज़ार लोगों के लिए रोकना जायज़ हैं ।

निश्चित आपका जवाब भी न ही होगा।

आपको सही लगे या न लगे आप सब बहुत बुद्धिमान व्यक्तित्व हैं लेकिन देश हित में विचार करे कही हम दिशा भटक तो नहीं गये हैं।

इस संदर्भ में मैंने पीएम  मोदी जी को पत्र लिखकर आग्रह किया हैं की अभी वक्त हैं निर्णय की पुन: समीक्षा करे अगर लॉकडाउन का अन्य एजेण्डा नहीं हैं तो विचार करके अनुग्रहित करे।

राकेश सिंह यादव
प्रदेशसचिव
म.प्र.कॉंग्रेस कमेटी
भोपाल



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