कागजी खानापूर्ति के बजाय वास्तविक धरातल पर जनता के साथ जुड़ने की जरूरत।

  कलयुग की कलम 

सुभाष चंद्र पटेल ब्यूरो रिपोर्ट /प्रयागराज, 29 मार्च 2020। एक तरफ कोरोना वायरस महामारी ने विश्व को अपने आगोश में जकड़ लिया है जिसके चलते पूरा भारत भी लॉक डाउन है तो दूसरी तरफ दशकों की भांति आज भी अधिकांश जनप्रतिनिधि केवल कागजी खाना पूर्ति में लगे हैं जबकि इस भयावह राष्ट्रीय आपदा के समय वास्तविक धरातल पर जनता के दुख में उसके साथ खड़े होने की जरूरत है।

 एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी के प्रबन्धक व वरिष्ठ समाजसेवी आर के पाण्डेय एडवोकेट ने आज मीडिया से फोन पर कहा कि कोरोना वायरस से बचाने व जनता को हर सम्भव मदद के लिए हमारी सरकार प्रयासरत है परंतु जनप्रतिनिधियों को जनता के साथ खड़े होने की जरूरत है। आज देखा जा रहा है कि पूरा देश इस आफत में एक साथ खड़ा है लेकिन जनप्रतिनिधियों को अपनी बड़ी भूमिका निभानी होगी। जनता के लिए पहले से निर्धारित विधायक निधि व सांसद निधि के बजाय जनप्रतिनिधियों व नेताओं को अपनी व्यक्तिगत आय व अर्जित चल सम्पत्ति में से ही पीएम व सीएम राहत कोष में दान देना चाहिए। उन्हें आज के हीरो अक्षय कुमार, टाटा, टाटा संस्, मुकेश अम्बानी, हिंदू मंदिरों, गुरुद्वारों, भईया जी का दाल भात परिवार व अन्य समाजसेवियों से सीख ग्रहण करते हुए इस राष्ट्रीय आपदा में अपने क्षेत्र के जनता को सीधे लाभ पहुंचाने की जरूरत है। कुछ तथाकथित नेताओं के मात्र चुनाव के समय घर-घर हाथ जोड़ने, चरण वन्दना करने व रुपये-दारू-मुर्गा आदि के प्रलोभन वाले नीति से वोट लेकर सत्ता में भूल जाने की नीति बदलनी होगी व सीधे जनता के लिए काम करना होगा। यह भी दुखद है कि अभी तक प्रशासन कालाबाजारी व प्राइस हाइक को रोकने में नाकामयाब रही है। प्रशासन को सादे वेश में थोक व फुटकर व्यापारियों एवं आढ़तियों को चेक करके कालाबाजारी व प्राइस हाइक के खिलाफ विधिक कार्यवाही करनी होगी। आज जनता को प्रताड़ना के बजाय स्नेह व सहयोग की जरूरत है जिसे सामाजिक संस्थाएं, जनप्रतिनिधि व प्रशासन मिलकर बखूबी कर सकते हैं।

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