संविधान बचाओ आवाज उठाओ

गर गर बदलो गे मेरे अनुच्छेद हो जाओगे बर्बाद फिर ना रहेगा कोई सहारा ना बचा पाओगे देश क्योंकि मैं संविधान हूं संविधान से चलेगा देश

ये शान है, ये मान है, वतन का ये सम्मान है,

चले वतन इसी से है, यही मेरा अभिमान है,

ये मेरा संविधान है।

उद्देशिका का मंत्र है, लोकतंत्र ये गणतंत्र है, न्याय की ये नीति है, सम्पन्नता की रीति है। अखंडता इसी से है, यही निरपेक्षता का मान है, ये मेरा संविधान है।।

कानून की दलील है, स्वतंत्रता का ये मील है, कर्तव्य है, अधिकार है, विचारों का अंबार है। स्वराज भी इसी से है, इसी से वतन महान है, ये मेरा संविधान है।।

मत तोड़ो संविधान को मत छेड़ो संविधान को नासा मिलेगा देश कभी छोड़ इस संविधान को

तुम लाख करो दावे नहीं चलेगा देश कभी  देश का यह विधान है हां यह संविधान है।

तुम जितना छोड़ोगे मुझको मैं उतना सकरी रहूंगा बिन मेरे तुम इतना टिक पाओगे हमें संविधान हूं संविधान से चल पाओगे

गर गर बदलो गे मेरे अनुच्छेद हो जाओगे बर्बाद फिर ना रहेगा कोई सहारा ना बचा पाओगे देश क्योंकि मैं संविधान हूं संविधान से चलेगा देश

लेखक 

अब्दुल कादिर खान

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