कोरोना से बचने की भांति मंदिरों ,मस्जिदों,मठ, चर्चों, गुरुद्वारों से भी दूरी बनाए रखें,पाखंड से मुक्ति के लिए कोरोना वरदान साबित होगा-  मास्टर बुद्धसेन पटेल 

कलयुग की कलम 

मंदिर,मस्जिद, मठ,गुरुद्वारा, चर्चों में कोई भगवान अल्लाह,ईशा नही रहते यह तो निकम्मो की एक दुकान मात्र है ।अच्छा मौका है धार्मिक गुलामी से मुक्त होने के लिए यह कोरोना की महामारी में 33 करोड़ देवी -देवताओं एवं तथाकथित फ़र्ज़ी भगवानो,अल्लाह,ईशा,पैगम्बर आदि कोई काम नही आ रहे हैं,उन्हें भी मास्क,सेनिटाइजर की आवश्यकता पड़ी है और पंडा पुजारी,मौलवी,पादरी सभी अन्तर्धान होकर संपत्ति की रक्षा करने में लग गए हैं। मैं तो बहुत पहले से कह रहा था कि कोईभी भगवान मठ-मंदिरों में नही रहता,अगर कोई है तो मानव के रूप में डॉक्टर, वैद्य, हकीम है जो जड़ी बूटियों एवम विज्ञान सम्मत दवाइयों से मानव को जीवन देते हैं।इसलिए मंदिरों,मठों, गिरिजघरों,गुरुद्वारों, मस्जिदों में जाना बंद करो अपने घरों में जैसे अभी कैद होकर इबादत कर रहे हो उसी प्रकार हमेशा इबादत करने की आदत बना लेने की आवश्यकता है,और जिस तरह एक  प्रधानमंत्री कि एक अपील पर सड़क पर ताली,थाली ,शंख बजाकर दुनिया के सामने देश की नाक कटाने में सहयोग किया गया है ठीक उसी प्रकार हमेशा घर मे ही ताली ,थाली बजाते रहें। किसी भी फ़र्ज़ी भगवान के पास न जाने का संकल्प ले लें ,भारत सरकार से अपील है कि  देश के सभी प्रकार के देवी देवताओं, भगवान,अल्लाह की सम्पूर्ण संपत्ति को देश की जनता के स्वास्थ्य ,शिक्षा हेतु राजसात करके  देश की एक अरब 30 करोड़ आवादी के बीच संपत्ति को बराबर बांट दे ,इससे भविष्य में आने वाली किसी भी महामारी आपदाओं से छुटकारा मिलेगा ,तभी यह भारत देश पुनः सोने की चिड़िया का देश बन पायेगा।

                     मास्टर बुद्धसेन पटेल

                         प्रदेशाध्यक्ष

        राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच मध्यप्रदेश

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