लॉक डाउन को नहीं समझ पा रहे हैं लोग,बिहारी होने की टशन में हैं सभी

कलयुग की कलम 

भारत सरकार ने कोरोना वायरस की गम्भीरता को भांपते हुए,जनता कर्फ्यू लगाया और देश के सभी राज्यों की सरकारों से कई आग्रह किये और समीचीन निर्देश भी दिए ।इस कड़ी में बिहार सरकार ने बिहार को लॉक डाउन कर दिया ।लेकिन लोग लॉक डाउन के मायने नहीं समझ पा रहे हैं और सरकार के आदेशों की धज्जियाँ उड़ाते हुए, खुद अपने लिए कब्र खोद रहे हैं ।

लॉक डाउन का मतलब अप्रत्यक्ष रूप से कर्फ्यू ही होता है लेकिन इसमें जनता के लिए आवश्यक सेवाएं बहाल रहती हैं ।23 मार्च को बिहार के सभी 38 जिलों में लोगों ने अहले सुबह से ही लॉक डाउन की ना केवल धज्जियाँ उड़ाईं बल्कि मनमानी का इतिहास बना डाला ।हांलाकिं सरकार के शख्त निर्देश के बाद दोपहर से सभी जिलों में पुलिस और प्रशासन ने शख्ती दिखानी शुरू की ।नतीजतन कुछ समय के लिए अफरातफरी के माहौल पर थोड़ा लगाम लगा ।लेकिन इसके बाद शाम में लोगों ने फिर से नौटंकी शुरू कर दी ।

बानगी के तौर पर हम छपरा और सहरसा की तस्वीर से आपको रूबरू करा रहे हैं ।हांलांकि ऐसी जिंदा तस्वीरें हमारे पास लगभग सभी जिलों से आई हैं ।देखिए छपरा में लोग किस तरह आम दिनों की तरह भीड़ की शक्ल में अपने काम में मगन हैं ।लगता है कि सभी कुछ सामान्य है ।सहरसा की तस्वीरों को देखकर, तो आपका कलेजा मुंह को आ जायेगा ।पहली तस्वीर जिला मुख्यालय के कचहरी ढ़ाला की देर शाम की है ।अंधेरे के बाबजूद लोग भीड़ की शक्ल में अपने काम को अंजाम दे रहे हैं ।यह बेहद खास तस्वीर सहरसा के पंचगछिया गाँव की है,जहाँ लोग, मुंगेर घाट से गंगाजल भरकर, पंचगछिया के राम ठाकुर स्थान आये हैं ।इन्हें देखकर साफ पता चल रहा है कि इनके मन में कोरोना वायरस को लेकर कोई भय नहीं है ।ऐसी तस्वीरें मौत को खुला निमंत्रण दे रही हैं ।

हमेशा नियमों को तोड़ने में आगे रहने वाले बिहारियों को घर में नजरबंद करने के लिए सरकार की तमाम शख्ती की जगह,अब सीधे कर्फ्यू लगाने की जरूरत है ।

पटना से वरिष्ठ सहयोगी मुकेश कुमार सिंह की स्पेशल रिपोर्ट


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