जबलपुर नगर निगम सीमा में 27 अप्रैल तक टोटल लॉकडाउन का होगा कड़ाई से पालन, जिला दंडाधिकारी भरत यादव ने जारी किया आदेश

कलयुग की कलम रिपोर्टर सोनू त्रिपाठी 

जबलपुर- कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी भरत यादव ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत पूर्व में जारी आदेश में संशोधन कर जबलपुर शहर की नगर निगम सीमा क्षेत्र में 27 अप्रैल तक टोटल लॉकडाउन का पूर्णत: कड़ाई से पालन कराने संबंधी आदेश आज जारी कर दिया है। जारी आदेश में अत्यावश्यक सेवा वाले विभाग नगर निगम, पुलिस, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, रेल विभाग, रक्षा विभाग एवं अन्य इमरजेंसी ड्यूटी वाले शासकीय कर्मचारी केवल ड्यूटी के प्रयोजन से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए टोटल लॉकडाउन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे । लेकिन इन कर्मचारियों को अपने साथ पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा।जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जबलपुर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत समस्त सब्जी व फल मंडियां, थोक एवं फुटकर किराना दुकानें पूर्णत: बंद रहेगी। आवश्यक वस्तुओं की दुकानों से होम डिलेवरी, सब्जी, फल ठेलों से विक्रय की व्यवस्था प्रणाली यथावत जारी रहेगी। उचित मूल्य की राशन दुकानें (पीडीएस की दुकानें) पूर्णत: बंद रहेगी । जिले के अंतर्गत अति आवश्यक एवं कोरोना कार्य छोड़कर समस्त निजी एवं शासकीय कार्यालय पूर्णत: बंद रहेंगे । दो पहिया, तीन पहिया एवं चार पहिया वाहनों का आवागमन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। केवल अति आवश्यक सेवाएं वाले वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट होगी । कोई भी व्यक्ति अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलेगा। आदेश में कहा गया है कि केवल दूध विक्रय दुकानें प्रात: 6 बजे से प्रात: 8 बजे तक एवं सायं 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक ही खुली रहेगी । दवाई की दुकानें इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगी ।  कृषक, गेहूं, चना उपार्जन इत्यादि कृषि व उपार्जन कार्य में लगे व्यक्तियों एवं वाहनों को कर्फ्यू पास की आवश्यकता नहीं होगी ।  इस कार्यालय से पूर्व में जारी आदेश द्वारा जो छूट दी गई थी वह समस्त छूट यथावत रहेगी ।  इसमें पशुपालन, मत्स्यपालन, बागवानी इत्यादि अन्य कृषि संबंधी गतिविधियाँ शामिल हैं । प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं व्यवस्था बनाने हेतु सामाजिक संगठन जिन्हें पूर्व में पास जारी किया गया है वो इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की विहित धाराओं तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत कार्यवाही की जायेगी ।

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