“कोरोना योद्धाओं में पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों को शामिल नहीं करना शिवराज सरकार की असंवेदनशीलता”

“डब्ल्युएचओ के निद्रेशों का उल्लंघन हैं प्रायवेट डॉक्टरों एंव पत्रकारों को पचास लाख का कोरोना कवच नहीं देना”

“पत्रकारों एंव डॉक्टरों को भी कर्तव्य निभाते हुए क्षति होने पर शहीद का दर्जा व सम्मान दिया जाये”

“कॉंग्रेस प्रदेशसचिव ने प्रधानमंत्री डब्ल्यूएचओ एंव सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज की”

कलयुग की कलम 

म.प्र. कॉंग्रेस कमेटी के प्रदेशसचिव राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाया हैं की म.प्र. के मुख्यमंत्री ने असंवेदनशील निर्णय करके कोरोना योद्धाओं में पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना बनायी हैं।लेकिन इस योजना के लाभ से पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों को वंचित किया गया हैं ।जबकि वास्तविकता के धरातल पर मीडिया के पत्रकार एंव प्रायवेट डॉक्टर दिन -रात कोरोना संक्रमण से जंग लड़ रहे हैं।प्रिंट एंव इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार लगातार सच उजागर कर रहे हैं।डब्ल्यूएचओ ने भी कहा हैं की पत्रकारों को पूर्ण सुरक्षा कवच मिलना चाहिए क्योंकि कुछ राज्य या देश प्रभावितों की संख्याओं में हेर फेर कर सकते हैं,इसलिए पत्रकारों की रिपोर्टों के ज़रिये सही आँकलन किया जाएगा।

वहीं प्रायवेट डॉक्टरों को भी पूर्ण सुरक्षा कवच दिया जाना चाहिए एंव समस्त किट भी प्रायवेट डॉक्टरों को उपलब्ध सरकार को कराना चाहिए ।

वर्तमान शिवराज सरकार ने पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों के हितों की सुरक्षा से पल्ला झाड़ लिया हैं।शिवराज सरकार पत्रकारों द्वारा जनहित में उजागर किये गये सत्य को देखना या सुनना नहीं चाहती हैं ,इसलिए मुख्यमंत्री कोविड -19 योद्धा कल्याण योजना से पत्रकारों एंव डॉक्टरों को सुरक्षा लाभ से बाहर रखा गया हैं।

इस अमानवीय एंव अदूरदर्शिता पूर्ण निर्णय के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री,डब्ल्यूएचओ एंव चीफ़ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर शिकायत करके तत्काल प्रभाव से म.प्र. में कोरोना के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों को मुख्यमंत्री कल्याण योजना से पचास लाख का सुरक्षा कवच प्रदान किया जाये एंव यह योजना 30 मार्च से 30 जून की समयावधि के लिए लागू हैं।इस समयावधि में कोरोना के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे सभी योद्धाओं को सरकार कोरोना कार्यकाल में कार्य करने का प्रमाणपत्र जारी करे जिससे की किसी भी प्रकार की क्षति या मृत्यु होने पर तत्काल सुरक्षा कवच की राशि परिवार को मिल सके।म.प्र.की शिवराज सरकार ने इस योजना का लाभ देने का अधिकार कलेक्टर की रिपोर्ट को अधिकृत किया हैं।जिससे सरकार की नीयत पर शंका हो रही हैं।शिवराज सरकार की नीयत अगर साफ़ हैं तो 30 मार्च से 30 जून तक कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों को कोरोना ड्यूटी का विशेष नियुक्ति पत्र जारी करे जिससे जो भी कर्मचारी कोरोना का शिकार होकर कर्तव्य पूर्ण करते हुए अपने प्राणों की आहुति देता हैं तो उसकी आहुति शासकीय लालफ़ीताशाही की भेंट न चढ़े।

शिवराज सरकार की नीयत साफ़ हैं तो तत्काल यह पत्र जारी करे।जिससे कोरोना से संघर्ष कर रहे योद्धाओं का मनोबल बढ़े और सुरक्षा कवच होने से उनके परिवार भी चिंतित न हो।

यह सारे विषय पत्र में शिकायत के रूप दर्ज किये गये हैं।

विशेष मॉंग यह की गई हैं की कोरोना से संघर्ष करते हुए अगर पत्रकार या प्रायवेट डाक्टर अपना कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देते हैं तो इन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।कोरोना महामारी में पत्रकारों एंव प्रायवेट डॉक्टरों की अहम भूमिका हैं।ऐसे में यह कार्य करके हुए कोरोना संक्रमण से मृत्यु होने पर शहीद का दर्ज एंव सम्मान दिया जाना चाहिए।

राकेश सिंह यादव

प्रदेशसचिव 

म.प्र. कॉंग्रेस कमेटी 

भोपाल



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