मप्र शासन से ऊपर हैं सेमरवारा का उपज खरीदी केंद्र

कलयुग की कलम/ योगेश योगी /सतना

लॉकडाउन में जंहा किसान पहले से ही मुसीबत का सामना कर रहे हैं वहीँ सतना जिले के खरीदी केंद्र अपनी मनमानी पर उतारू हैं। किसानों से तौल के नाम पर अतिरिक्त राशि और अतिरिक्त वजन लिया जा रहा है इसके आलावा समिति द्वारा नियुक्त सर्वेयर द्वारा जान बूझकर गेंहू को रिजेक्ट किया जा रहा है जब हमने किसानों से बात की तो उन्होंने बताया कि प्रति बोरी अतिरिक्त राशि सर्वेयर को न देने के कारण वह फसल को फेल कर देता है जबकि जो उसे प्रति बोरी अदा कर देता है उसका कैसा भी अनाज हो पास कर दिया जाता है। कल दिनांक 23 अप्रैल को किसानों के मेसेजे आए थे जिनकी तौल का समय 2 से 5.30 बजे तक था लेकिन 6 बजते ही यह कहकर किसानों को वापस जाने के लिए कह दिया गया कि फसल की तुलाई कल होगी। जब इस बात पर किसानों ने आपत्ति की और सांसद महोदय और कलेक्टर से शिकायत की बात की तो समिति के आला अधिकारी किसानों के साथ अभद्रता से पेश आने लगे यँहा तक कि सहकारी समिती सेमरवारा के द्वारा नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर सत्यम चतुर्वेदी जो खुद सर्वेयर बना बैठा है ने किसानों से साफ साफ कहा कि ऐसे कई सांसद और कलेक्टर आगे पीछे घूमते हैं जाओ जंहा शिकायत करनी है कर दो। यँहा हमारी मर्जी चलती है जिसकी मर्जी होगी जब फसल लेंगे जिसकी नहीं होगी नहीं लेंगे न मेसेज से मतलब न समय से। जब इस बात की शिकायत सुमंत दीक्षित समिति प्रबधंक से की गई तो वो भी सर्वेयर के सुर में सुर मिलाते दिखे। ओबीसी महासभा  प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा योगेश योगी किसान ने शिवराज सिंह ने फेसबुक और ट्विटर पर टैग करके खरीदी के दिन 23 अप्रेल को ही वीडियो लाइव किया जिसके बाद 3 ट्रॉली की तौल हुई और फिर किसान दादुभाई लोधी हड़हा और यशवंत सिंह हड़हा की ट्रॉली की तौल पुनः यह कहते हुये कैसिंल कर दी गई कि नेतागिरी कर रहे हो और हमारा वीडियो वायरल कर रहे जंहा शिकायत करनी हो कर आओ देख लेंगे हम यह कर कर ट्रॉली कैसिंल कर रहे हैं कि तुम्हारी फसलों में 20% मटरी है। इन किसानों की तौल भी 23 अप्रैल को ही होनी थी जो रात के 11.30 बजे अपनी ट्रोली लेकर घर आ गए जिसका वीडियो प्रूफ मौजूद है। अब प्रश्न ये उठता है कि गेंहूँ की फसल में वैसे भी किसान 2-4-D का छिड़काव करता है तो अन्य फसलों के अवशेष होना कमतर ही होता है और अगर होते भी हैं तो उसकी भी मात्रा निश्चित है कि कितनी होनी चाहिए। साथ ही 50.500 ग्राम की तौल का नियम पूंछा गया तो सभी ने चुप्पी साध ली कहा कि इतने वजन की तौल ऊपर वाले अधिकारियों के कहने पर हो रही है। जबकि शासन द्वारा 50किलोग्राम की पर्ची का टैग लगाया जाता है और अगर उसमे बोरी का वजन (180ग्राम) सम्मिलित कर लिया जाए तो किसी भी सूरत में 50.200 ग्राम से ज्यादा की तौल अनुचित है। सर्वेयर का कहना है कि फसल की नमी की वजह से 300 ग्राम प्रति बोरी अतिरिक्त तौला जा रहा है ताकि नमी सूखने पर वजन बना रहे। वंही किसानों का कहना है कि कोरोना के चलते फसल की कटाई 15 दिन से अधिक लेट हो गई और गहाई आदि करने में समय लगा गेँहू का एक भी दाना नमी युक्त नहीं है यह खुली लूट है। और अगर अधिकारियों के कहने पर 300 ग्राम अतिरिक्त तौला जा रहा है तो यह और भी दुर्भाग्य पूर्ण है। चूँकि समिति ने अपने रिश्तेदारों को ऑपरेटर कम सर्वेयर नियुक्त किया है और मिलकर किसानों के खून पसीने की कमाई पर खुली लूट को मप्र सरकार की नाक के नीचे अंजाम दिया जा रहा है  जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।किसानों ने सांसद सतना और कमिश्नर रीवा से इस बात की शिकायत की है तथा ख़रीदी केंद्र की मनमानी रोकने के साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की गुहार लगाई है।

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