इस्लाम सिखाता है गरीबों की मदद और गमों  में शरीक होना बाजारों का बाई काट नहीं अपने खर्च का सदुपयोग करें 

गरीबों की मदद करें अपनी ईद की खुशियां खरीदारी छोड़ उस पैसे से देश के गरीबों की मदद करें

एक यादगार ईद मनाने को हिंदुस्तान है तैयार

मेरे प्यारे दोस्तों इस वक्त पूरी दुनिया एक आसमानी महामारी की शिकार है।

इसके साथ साथ एक संकुचित मानसिकता की भी शिकार है।

पूरी दुनिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार हुआ है और उसका दुरुपयोग भी धड़ल्ले के साथ हो रहा है।

देश में तरह-तरह की मैसेज चल रहे हैं कि ईद और रमजान को लेकर मार्केट का बायकाट किया जाए जिससे हिंदू भाइयों का नुकसान होगा या व्यापारियों का नुकसान होगा

जब की बात यह चलानी चाहिए कि हम ईद में अपनी जरूरत की चीजें अपने शौक और श्रृंगार का सामान ना खरीद कर उस पैसे से गरीबों की मदद करेंगे 

ईद के कपड़ों जूते चप्पल टोपी इत्र रुमाल मैं एक व्यक्ति कम से कम ₹2500 का खर्च ईद के त्यौहार में अपने कपड़े जूते और दीगर जरूर याद के लिए करता है

अगर यह पैसा हम अपने  जरूरत  में खर्च ना करके किसी गरीब की मदद करेंगे तो एक बड़ा आज़रों सवाब और देश की बदहाली के दौर से इंसानियत को बचाने में मददगार होगा

मेरे प्यारे दोस्तों जिस तरीके से हम सब अपनी परेशानी में मुब्तिला हैं उसी तरीके से हमारे व्यापारी भाई भी अपनी अपनी परेशानी में मुब्तिला हैं

इसवक्त जो भी मैसेज पोस्ट चल रही है वह हमारे व्यापारी भाइयों को आहत कर रही होंगी और नहीं भी

लेकिन हर मुसलमान भाई का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए बल्कि उद्देश्य हो कि हम अपने निजी खर्चे ईद और रमज़ान के खर्चों को बचाकर उस पैसे से गरीबों की मदद करेंगे उसके साथ जो भी सदका़ और ज़कात का पैसा है वह सीधा बगैर भेदभाव हर एक गरीब परिवार तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे और पहुंचा भी रहे हैं।

मेरे प्यारे दोस्तों इस वक्त हमारा एक एक रुपए बड़ा कीमती है क्योंकि देश और दुनिया के सारे उद्योग काम धंधे बंद पड़े हैं और सबसे ज्यादा मदद की जरूरत  पूरे आलमे इंसानियत को है।

मेरे प्यारे दोस्तों पहली बार देश में और दुनिया में ऐसा हुआ है कि काबा बैतुल्लाह का तवाफ मस्जिदों में नमाज है और दीगर धार्मिक कार्यक्रम खुले मंच से रोक दिये गए हैं।

मेरे प्यारे दोस्तों वो इसलिए हैं क्योंकि इंसानियत की बका़ सबसे पहले जरूरी है ।

और इस चीज़ की इजाजत इस्लाम धर्म ही नहीं दुनिया के दिगर धर्म मज़हब भी देते हैं।

लिहाजा मार्केट बंद करने के जो भी मैसेज पोस्ट हो रही है उस पर इस तरीके के संदेश लिखना कि हमारे मार्केट बैन करने से हिंदू और व्यापारियों को नुकसान होगा यह बिल्कुल सही नहीं है ।

मार्केट बैन करने से हिंदू मुस्लिम ही नहीं देश के हर एक इंसान का नुकसान हो रहा है।

लिहाजा हम यह लिखें कि हम ऐहद करते हैं कि हम मार्केट से ईद और रमज़ान की अपनी निजी जरूर यात की चीजें तलक रोकते हुए उस पैसे से गरीबों की मदद करेंगे 

यह हम देश हित के लिए समाज हित के लिए और मानवता के लिए कर रहे हैं।

आज जो सबसे जरूरत की चीज है जिससे हम और हमारा समाज और हमारा देश उन्नति और प्रगति की ओर बढ़ेगा वह है अपने जान माल का मानवता के लिए इस्तेमाल करना

आओ हम सब मिलकर कसम खाएं ऐहद करें कि हम ईद और रमज़ान की चीजों की खरीदारी कम करते हुए उस पैसे से गरीबों की दिल खोलकर मदद करेंगे

लेखक-अब्दुल कादिर खान 

मो.9753687489

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