पालघर में संतो की हत्या एक संयोग या प्रयोग - सुनीलमिश्रा केशवदास

16 अप्रैल की रात 9 - 10 बजे के बीच में महाराष्ट्र पालघर इलाके के गढ़चिंचले नामक गॉव में जूना अखाड़े के दो साधु व उनके साथ वैन गाड़ी ड्राइवर की लगभग 200 की भीड़ ने लाठी डंडे ईट पत्थरों से पुलिस कर्मियों के सामने बड़ी निर्भीकता व निर्दयता से हत्या की जिससे पूरे भारतवर्ष के संतो में तथा भारतीय जनमानस में शोक आक्रोश और भय का भाव दिखाई पड़ रहा है लेकिन यह घटना अपने पीछे इन सवालों को उत्पन्न कर रही है 

सवाल नंबर 1 - इस समय देश में लॉक डाउन की स्थित में मुंबई जैसे महानगर से निकलकर 120 किलोमीटर का सफर कैसे कर गये जब की महाराष्ट्र में ही कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज है और लाॅक डाउन का यही नियम की कोई कहीं भी जाए 

सवाल नंबर 2 - जब ये साधु जंगल के रास्ते से जा रहे थे तो उन्हें वन विभाग के संतरी ने रोका   तो ग्रामीण भीड़ का आह्वान किसने किया

सवाल नंबर 3 - जब भीड़ एकत्रित हुई तो उस भीड़ के अंग बने वहाँ के सम्मानित व माननीय क्या भूमिका निभाई भीड़ को नियंत्रित करने में 

सवाल नंबर 4 - जब पुलिसकर्मी वहाँ पहुँच गए तो उन्हों ने स्थिति सम्हालने के लिए बल प्रयोग या अपने ऊपर हमला होते देख हथियार का प्रयोग क्यों नहीं किया 

सवाल नंबर 5 - वीडियो में जिस तरह से पुलिसकर्मी बृद्ध साधु को हिंसक भीड़ के हवाले आसानी से सौंप कर चलते हुये जा रहा है इससे पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध दर्शा रही है कि नहीं 

इन सवालों के बीच हमारी यही मॉग है कि सर्वप्रथम इस घटना की सीबीआई जॉच हो और वहाँ पर घटना के समय उपस्थित पुलिसकर्मी व वन विभाग के संतरी का तथा वहाँ के सरपंच आदि माननीयों का नार्को टेस्ट करवाया जाए हमें विश्वास है कि घटना की सच्चाई जरूर सामने आयेगी

            सुनीलमिश्रा केशवदास

               राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख

   कलयुग की कलम - राष्ट्रीय समाचार पत्रिका


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