बंगाल-झारखंड में इस रामनवमी पर नहीं फहरेगा का पताका रामनवमी का पताका शेखपुरा से बंगाल,झारखंड व उत्तर बिहार जाता है।

कलयुग की कलम 

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिएनेशनल लॉकडाउन ने शेखपुरा के पताका कारोबार में ब्रेकडाउन खड़ा कर दिया है। इस लॉकडाउन के यहां के परंपरागत पताका कारोबार पर काफी बुरा असर हुआ है। पताका निर्माताओं के लाखों रुपयों की पूंजी डंप हो गई है गौरतलब है कि पताका निर्माण से जुड़े कारीगरों का काम भी छिन गया है। बताना जरूरी हैं रामनवमी को लेकर शेखपुरा में पताका निर्माण का काम बड़े पैमाने पर होता है। यहां कुछ बड़े कारखानों के साथ घरों में कुटीर उद्योग के रूप में भी पताका बनाने का काम होता है। नगर में बनाया हुआ रामनवमी का पताका बिहार के विभिन्न जिलों खासकर उत्तर बिहार के साथ बंगाल तथा झारखंड में सप्लाई होती है। लॉकडाउन में वाहनों का परिचालन ठप होने से पातकों की सप्लाई ठप पड़ी है। स्थानीय कारीगर तथा महाजन पूंजी लगाकर माथा पीटने के साथ चीन को कोस रहे हैं।इस कारोबार से जुड़े रणधीर कुमार भदानी तथा ओमप्रकाश भदानी बताते हैं जिला में रामनवमी का पताका बनाने का काम दशहरा खत्म होने के बाद ही शुरू हो जाता है। शेखपुरा के आधा दर्जन कारखानों में 50 से अधिक कारीगर पताका बनाने का काम करते हैं। इसके अलावे कई घरों में भी महिलाएं पताका बनाने का काम करती हैं। पताका बनाने का काम तो पूरा हो गया। अब लोग दूसरे शहरों ने इसकी सप्लाई की तैयारी कर रहे थे।तभी कोरोना संकट की वजह से देश भर में लॉकडाउन की घोषणा होगई आसनसोल-रांची तक जाता है पताकाशेखपुरा में बना रामनवमी का पताका सैकड़ों मील दूर तक सप्लाई होता है। इस काम से जुड़े कारोबारियों ने बताया ।

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