बाकल थाना बनने के बाबजूद क्षेत्र में बेधड़क जारी है अवैध गोरखधंधे

लॉकडाउन में भी नही दिखाई दे रही पुलिस की सक्रिय भूमिका

बाकल:-बाकल पुलिस चौकी का उन्नयन कर बाकल थाना बनाया गया जिससे लोगो को पुलिस मदद मिल सके और जनता को आसानी से सहायता मिल सकें लेकिन इन सबसे दूर बाकल थाना बनने के बाद से अवैध मादक पदार्थों की बिक्री एवं अवैध कामो में और तेजी इज़ाफ़ा हुआ है।वही कोरोनाकाल में भी इन सभी अवैध कामो में रोक न लग पाना जिम्मेदारो पर सवालिया निशान हैं जबकि जिले की सभी सीमाएं सील है बाबजूद लागातार अवैध शराब सहित अन्य अवैध कार्य जारी है।

स्टाफ़ बढ़ा लेकिन नही घटा अवैध धंधों का ग्राफ़

बाकल थाना बनने से पुलिस स्टाफ़ भी बढ़ गया है जिसमे प्रशासन का राजस्व का भी बजट बढ़ा है जिससे थानाक्षेत्र की जनता को पुलिस मदद मिल सके और अपराधों में लगाम लगाई जा सके लेकिन शासन प्रशासन का यह उद्देश्य पूरा होता नही दिखाई दे रहा है।क्योंकि अवैध गोरखधंधों में लिप्त माफ़िया धड़ल्ले से क्षेत्र में माफ़ियाराज चला रहे है।अवैध शराब, सट्टा, गाँजा,जुआ के फड़ जगह जगह सज रहे है।

लॉकडाउन में अवैध शराब की बिक्री में आई तेज़ी,आबकारी विभाग निष्क्रिय

आपको बता दे कि लॉकडाउन की घोषणा होते ही सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में लाइसेंसी शराब दुकानों को सील कर दिया गया था।जिससे कोरोना महामारी का संक्रमण तेज़ी से न फैल पाएं लेकिन ऐसा न हो सका आज भी दुगनी तेजी से जगह जगह प्रत्येक गावो में अवैध शराब बेची जा रही है वही अवैध शराब प्रति पाव 150 से रुपए में बेची जा रही है जिससे माफियाओं की दोगुनी कमाई हो रही है। और यह सब जिम्मेदार विभाग के नाक के नीचे हो रहा है।वही इक्कदुका केस बनाकर इतिश्री की जा रही है जिससे साबित भी होता है कि अवैध शराब का अवैध धंधा बदस्तूर जारी है।

लॉकडाउन के दौरान पकड़ी गई थी 406 शराब की पेटियां

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों पहले सूचना मिलने पर बाकल लाइसेंसी शराब दुकान के बाजू वाले मकान में बहोरीबंद SDM सहित राजश्व टीम ने छापेमार कार्यवाही की थी जहां  से 406 पेटी अवैध शराब जप्त हुई थी  जिसकी क़ीमत लगभग 10 से 12 लाख रुपए आंकी गई थी। बाकल थाना कुछ ही दूरी पर होने के बाबजूद यह यह कारनामा हुआ जो सवालिया निशान खड़े करता है।

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