मोदी जी मन की बात के पहले बताएं थाली ताली घंटी दीपक से कितने  मरीज ठीक हुए.. शिव सिंह

कलयुग की कलम 

 25 अप्रैल 2020... जनता दल सेक्यूलर के प्रदेश अध्यक्ष शिव सिंह  एडवोकेट ने कहा कि  देश में फैली कोरोना महामारी के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  जी मन की बात के माध्यम से देश को संबोधित करने जा रहे हैं  इसके पूर्व कई संदेशों के माध्यम से देशवासियों को हो रही परेशानी के लिए माफी मांगी इसके साथ ही लॉकडाउन मे  लोगों के सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया  अच्छी बात है कि मन की बात के माध्यम से  प्रधानमंत्री जी वैश्विक महामारी के चलते उत्पन्न हालातों पर सरकार की मंशा जाहिर  करने जा रहे हैं लेकिन सवाल बरकरार है कि लॉक डाउन के बाद कि  स्थिति का आकलन हम आसानी से लगा सकते हैं कि  वर्तमान परिपेक्ष में करोड़ों लोगों ने अपना रोजगार खो दिया होगा और यह भी सत्य है कि इस लॉक डाउन के कारण रोजगार देने वाले सेक्टर उस स्थिति में नहीं होंगे कि वह तत्काल लोगों को रोजगार दे सके मोदी जी कोरोना के कारण देश में जो परिस्थितियां निर्मित हुई है  ऐसे में महामारी के बाद देश में आर्थिक क्षेत्र में क्या करने की आवश्यकता है मोदी जी से अपील है कि लॉक डाउन के बाद सरकार का क्या स्टैंड रहेगा वह भी स्पष्ट करें कोरोना वायरस कि लड़ाई सिर्फ सरकार भर ने नहीं लड़ी हर एक देशवासी ने लड़ी है  सबकी आर्थिक रूप से कमर टूटी है  व्यापारी वर्ग ने निम्न वर्ग ने मजदूर और गरीब  मध्यम वर्ग ने सभी ने कोरोना से जंग लड़ी  भविष्य की तस्वीर क्या निर्मित करेंगे वह भी स्पष्ट होना चाहिए  क्योंकि देश का हर नागरिक अभी असमंजस में है कि आगे  क्या होगा  अगर ग्रह युद्ध  से बचना है तो सरकार को भविष्य की तस्वीर बतानी होगी  विश्व के अनेकों देशों ने वहां के नागरिकों को आर्थिक राहत देने की पहल की है क्या भारत को ऐसी पहल की आवश्यकता नहीं है इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती है वर्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 137 करोड है इसमें से लगभग 103 करोड काम करने की उम्र में है 15 साल से ऊपर किसी भी प्रकार के साथ सशुल्क  औपचारिक अनौपचारिक दैनिक वेतन या  किसी प्रकार के स्वरोजगार को शामिल करने के लिए हमें  रोजगार की  व्यापक परिभाषा लेनी चाहिए 

इस परिभाषा का उपयोग करते हुए फरवरी 2020 में प्री कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन से लगभग 40. 4 करोड़ भारतीयों को नियोजित किया गया था  जैसा कि महीने के लिए CMIE  रिपोर्ट के अनुसार उस समय 3.4 करोड़ बेरोजगार थे  पिछले सप्ताह के आंकड़ों से उनकी तुलना करें CMIE  का अनुमान है कि तालाबंदी शुरू होने के 1 सप्ताह के भीतर काम करने वाली आबादी का केवल 27.7% (103 करोड़ ) कार्यरत था  जितनी नौकरी इस समय मिली उससे काफी ज्यादा  नौकरियां गई और उसकी संख्या रूस की पूरी जनसंख्या के बराबर हो सकती है सी.एम. आई के निर्देशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मुताबिक इस सप्ताह के  दौरान बेरोजगारी दर 23.4 प्रतिशत  है 36 प्रतिशत कि LPR ( श्रम भागीदारी दर ) और 27.7 प्रतिशत रोजगार दर  अब 20%  बेरोजगारी किसी देश के लिए बुरी खबर साबित हो सकती है जबकि यह आंकड़ा और भयानक तब होता दिख रहा है जब कामकाजी उम्र का केवल 27.7% कार्यरत है  बेरोजगारी का संकेत सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी( CMIE ) का सर्वेक्षण में दिखा है इस संगठन ने मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में टेलीफोनिक साक्षात्कार करके सैंपल जुटाया हो सकता है इनका सर्वेक्षण इतना व्यापक ना हो पर इसमें से जो संकेत उभर कर आया है वह  भयावह दिखता है   भारत देश में कोरोनावायरस के  चलते देशव्यापी लॉकडाउन के कारण नौकरी विनाश का पहला अनुमान है  इनकी संख्या भी चौंकाने वाली है और इस संदर्भ में गंभीरता दिखाना अत्यंत आवश्यक है  फरवरी माह में करीब तीन चार करोड़ बेरोजगार थे CMIE के मुताबिक कुल 40 करोड़ भारतीय मै से 27.7 % का रोजगार इन तीन हफ्ते मै चला गया है अर्थात करीब 12 करोड़ बेरोजगार  देश में बढ़ गए हैं और इनमें से अगर 8 करोड लोग अपने परिवार की मुख्य  आजीविका वाले हैं तो इस लॉक डाउन में 25 करोड़ के लगभग भारतीय  बेरोजगार हुए हैं  जिनके पास जीविका चलाने का कोई साधन नहीं रहा 

भारतीय लॉकडाउन  स्पष्ट रूप से इतिहास में दर्ज सबसे बड़ा एक स्ट्रोक नौकरी विनाश का कारण बना वहीं दूसरी तरफ लोगों में रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पर्याप्त खाद्यान्न होने के बावजूद लोग भूखे मरने को मजबूर है प्राप्त आंकड़े बताते  है कि इस समय 2 वर्ष का खाद्यान्न भंडारों में भरा है क्या सरकार है जनता को वह खाद्यान्न नहीं बांट सकती मुसीबत की इस घड़ी में सरकार को संवेदनशीलता का परिचय देना होगा प्रधानमंत्री जी आप से जुड़े लोग ऐसे विपरीत समय में भी सांप्रदायिकता का वायरस फैला रहे हैं यह समय  देश में हिंदू मुस्लिम एवं  गरीब अमीर करने का नहीं है  आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में गंभीर चिंतन करें तो भारत में 1000  मरीजों पर  0.7बेड है  तथा 1000 लोगों पर 0.8डॉक्टर हैं प्रधानमंत्री जी  आपने  लॉकडाउन दौरान  थाली ताली घंटी बजवाई टॉर्च दीपक जलवाए  तो आपको मन की बात कार्यक्रम में यह भी बताना होगा कि सरकार के ऐसे आयोजनों से  कितने मरीज ठीक हुए तथा जॉन्स हापकिंस यूनिवर्सिटी  के प्रोफेसर  एवं प्रसिद्ध  अर्थशास्त्री  स्टीव हैकी का कहना है कि  कोरोना से लड़ने  मोदी सरकार  पहले से तैयार नहीं थी तथा भारत के पास  उपकरण भी नहीं थे और लॉकडाउन कर दिया   तब से जनता घर में रहकर सोशल डिस्टेंस का पालन  कर रही है मास्क स्वयं खरीद रही है दान दे रही है बुजुर्गों का ध्यान दे रही है गरीब को खाना खिला  रही हैं पीएम फंड में पैसा दे रही है किराएदार से पैसा नहीं ले रही है अपना आर्थिक एवं महंगाई भत्ता कटवा रही है दुकान के नौकर का पैसा भी नहीं रोक रही लाठी खा रही  है भूख से मर रही है लेकिन मीडिया ने  आपके सिर कोरोना से जंग लड़ने वाले ताकतवर कामयाब प्रधानमंत्री होने का सेहरा बांध दिया इसका भी जवाब जनता मांगती है आपको आज लोगों के सब्र का इम्तिहान नहीं लेना चाहिए यही वह समय है जब सरकारों को अभी भी आगामी समय में आने वाली परेशानियों से निपटने के लिए खाका तैयार करना होगा कोरोना से लड़ाई लड़ने के साथ-साथ आर्थिक लड़ाई भी लड़नी होगी समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो भविष्य की तस्वीर भयावह होगी मोदी जी आपको निश्चित रूप से उस मंशा  को देशवासियों के सामने  रखना  होगा  जिससे लोगों को विश्वास हो कि उसकी चिंता सरकार को है हमारी पुन : अपील है कि सरकार कुछ ऐसा करें जिससे देश के अंदर अराजकता ना फैल सके l

                     
             शिव सिंह एडवोकेट
प्रदेश अध्यक्ष जनता दल सेक्युलर मध्य प्रदेश
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