सांसद देश बचाने अपनी बंद जुबान का ताला खोलें.. शिव सिंह

सांसदों की जगह उद्योगपतियों की सलाह पर सरकार लेती है फैसले

 मध्य प्रदेश समाजवादी नेता कौशल सिंह मीसाबंदी बृहस्पति सिंह राष्ट्रीय मतदाता जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बुद्धसेन पटेल जनता दल  सेक्यूलर के प्रदेश अध्यक्ष शिव सिंह एडवोकेट समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामायण सिंह समग्र उत्थान पार्टी के पूर्व प्रत्याशी शिवकुमार बाबा मिश्रा समाजसेवी ज्ञानेंद्र गौतम ने कहा कि इस कोरोना महामारी  संकट पर देश में लाकबंदी तो ठीक है लेकिन देश के सांसदों विधायकों के जुबान के ताले बंद क्यों है समूचा देश यह जानता है की कोरोना महामारी देश में कैसे आई कौन लोग लेकर आए और देश की सरकार ने उन कोरोना ग्रस्त लोगों कि क्या खातिरदारी किया सब आपके सामने है जब देश के अंदर कोरोना का एक भी केस नहीं था उसके  एक माह पहले से ही सरकार अवगत हो गई थी यदि सरकार चाहती तो देश के बॉर्डर को सील कर सकती थी लेकिन सरकार देश विदेश के प्रमुख लोगों की आवभगत करने में लगी रही और उधर देश के अंदर प्रदेशों की सरकार गिराने बनाने मैं अपने आप को मात्र केंद्रित रखा जैसे ही देश में  कोरोना मरीजों की संख्या सैकड़ा के पार हुई वैसे ही बिना किसी  तैयारी व रणनीति के बिना सांसदों की राय लिए उद्योगपतियों से सांठगांठ कर उनके सलाह पर लॉक डाउन किया गया कि यदि मजदूर घर चला जाएगा तो उनके उद्योग धंधे बंद हो जाएंगे इसलिए मजदूरों को बिना उनके घर पहुंचाए व बिना खाना व्यवस्था किए रात्रि को ही लॉकडाउन कर दिया गया  जिससे  मजदूर  बिना अपने खोली पहुंचे सड़कों पर भूखों मरने के लिए मजबूर हो गया  और देश के प्रत्येक जिले का मजदूर महानगरों में फंस गया इसके बाद मजदूरों के साथ सरकार का जो बर्ताव रहा पूरे देश ने देखा औरंगाबाद में ट्रेन से कटकर 16 मजदूरों की मौत के बाद उन मृत मजदूरों की लाशों को ट्रेन से उनके घरों तक पहुंचाया गया लेकिन उसके  पहले देश की गैर जिम्मेदार सरकार ने उन्हें पैदल चलने  पर मजबूर किया इसी तरह भूख से हजारों मजदूरों की  मौतें हुई मजदूर को पुलिस ने लाठियों से पीटा केमिकल से नहलाया  गया हजारों मजदूरों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए मजदूर ही पानी की खाली बोतलें पैरों में बांधकर यात्रा किया फिर सरकारों ने मजदूर को घर पहुंचाने के नाम पर उनके जेब काट लिए बहुत ऐसे भी मजदूरों से सामना हुआ कि सड़क से पैदल गुजरते रोटी के लिए अमीरों के घर में रास्ता चलते काम भी किया तब उसके बदले उसको रोटी मिली ऐसा दर्दनाक मंजर इस देश में कभी भी देखने को नहीं मिला  देश के मुखिया बार-बार पर्दे पर आकर संदेश देकर मन की बात करते रहे लेकिन बीमारी की रोकथाम कैसे होगी अर्थव्यवस्था कैसे सुधरेगी कोरोना वायरस कैसे भागेगा तथा देश के गरीब बेरोजगार मध्यमवर्गीय परिवार का चूल्हा कैसे जलेगा ऐसे ज्वलंत मुद्दों से निपटने कोई इंतजाम नहीं किए गए ना ही व्यापक स्तर पर कोई रणनीति तैयार की गई सिर्फ बड़े-बड़े डायलॉग से देशवासियों को  गुमराह किया जाता रहा साहब ने यह भी नहीं बताया कि देश के नागरिकों को कोरोना व भूख से बचाने जिन महान दानवीरो ने पीएम फंड में खरबों रुपए की संपत्ति दान किया उस पैसे का इस महामारी में किस स्तर पर उपयोग किया गया ऐसे किसी भी दस्तावेज को सरकार ने देश के सामने सार्वजनिक नहीं किया इस विपदा पर सरकार आर्थिक रूप से देशद्रोह कर रही है श्रम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है डीजल पेट्रोल  बिजली बिल एवं समस्त सामग्रियों  पर कोरोना टैक्स लगाकर दाम बढ़ाए जा रहे हैं आज बिना सघन जांच के  मजदूरों को उनके घर भेजा जा रहा है तथा जो महामारी के आंकड़े आ रहे हैं जन सामान्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे है आज प्रत्येक जिले के मजदूर महानगरों से लौट रहे सरकार के पास जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं  सरकार को चाहिए था कि पूरे देश के सांसदों की आम राय लेकर क्षेत्रीय हालातों से अवगत  होकर इस महामारी से लड़ने रणनीति तैयार करनी थी लेकिन  सरकार ने ना तो सांसदों की राय ली और ना कोई रणनीति तैयार की सरकार के कुछ खास मंत्री अपने अपने मन की बात करते रह गए अभी तक में कुछ विपक्षी दलों के  सांसदों ने अपनी बात  रखा लेकिन भारतीय जनता पार्टी एवं उनके सहयोगी दलों के सांसदों ने अपनी जुबान में ताला लगाकर देश की जनता व गरीब मजदूर की दुर्दशा का खूब तमाशा देखा  और सरकार  उद्योगपतियों के प्रभाव व दबाव में  रातों-रात  फैसले लेती रही आज देश के सांसदों को  जनहित के सवालों पर बोलना चाहिए था पूरी तरह चुप रह कर सरकार के हर सही गलत पर तालियां पीटते रहे  जिसका परिणाम यह हुआ कि आज देश के प्रत्येक सांसद का संसदीय क्षेत्र महामारी व भुखमरी बेरोजगारी से तंग व परेशान है यही हाल भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के विधायकों का भी है ऐसे हालातों में सांसद विधायकों को क्षेत्रीय हालातों से अवगत करा कर सरकार पर दबाव बनाना चाहिए अपनी बात रखना चाहिए क्योंकि  जनता ऐसी ही समस्याओं पर सेवा के लिए अपना प्रतिनिधि चुनती है और ऐसे में जिस राजा के राज्य की प्रजा दुखी होती है वह राजा नरक का भागी होता है ऐसा रामायण महाभारत में विधिवत लेख है  इसलिए जो सांसद विधायक ऐसे संकट में खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं तो उन्हें एक पल भी ऐसे जिम्मेदार पदों में रहने का अधिकार नहीं है उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए l 

                       
                शिव सिंह एडवोकेट
प्रदेश अध्यक्ष जनता दल  सेक्युलर मध्य प्रदेश
Share To:

Post A Comment: