भटकी हुई आत्मा जैसा कार्य कर रहे हैं आज के पत्रकार 

पत्रकारिता जगत में ऐसे तमाम पत्रकारों का जमावड़ा बना हुआ है जिन्हें आज के दौर में सार्थक सामाजिक मुद्दे नहीं सूझ रहे हैं शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं पर तो इन्हें जैसे मोतियाबिन्द हो गया है सामाजिक अराजकता के विषय पर, पुलिस ,प्रशासन , शासन की कुव्यवस्था पर लिखने के नाम पर ऐसे पत्रकारों के कलम की स्याही व गला दोनों सूख जाता है इन्हें जनता की पीड़ा जनमानस की समस्या से कोई दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं इनकी कलम सिर्फ शासक प्रशासक के माल्यार्पण, नाली पुल के उद्घाटन समारोह में ही किलकारी भरती हुई दिखाई देती है इनकी कलम क्रांतिकारी न होकर विघटनकारी बनी हुई है जो  देश समाज व पत्रकारिता जगत की पोषक बनने के बदले शोषक बनी हुई है


 सुनील मिश्रा केशवदास 
    कलयुग की कलम 
    नेशनल ब्यूरो चीफ
       जम्मू कश्मीर
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