वेतनभोगी व कागजी गरीबों के बजाय वास्तविक गरीब, मध्यम वर्ग, छोटे देवालय व पुरोहितों को आर्थिक सहायता दे सरकार। समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय।


          K K K न्यूज रिपोर्टर
                नैनी
        सुभाष चंद्र पटेल

हजारों की शराब, आलीशान मकान व लाखों की गाड़ियों का उपयोग करने वाले गरीब कैसे हो सकते हैं?

प्रयागराज,  कोरोना संकट काल के राष्ट्रीय आपदा में भी अधिकांश लोगों के साथ सरकार भी लकीर की फकीर बनी है जबकि आज वेतनभोगी व कागजी गरीबों के बजाय वास्तविक रूप से जरूरतमंद मध्यम वर्ग, छोटे देवालय व पुरोहितों को आर्थिक सहायता की अधिक जरूरत है।

जानकारी के अनुसार एनजीओ परमेंदु वेलफेयर सोसाइटी के प्रबन्धक व वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने मीडिया से वार्ता में उपरोक्त बातें करते हुए सरकारी व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए पूछा कि सरकार व सरकारी मशीनरी कब तक लकीर की फकीर बनी रहेगी? केवल जाति, मजहब व कागज के आधार पर गरीबी व मदद का निर्धारण गलत है। आखिर हजारों की शराब, आलीशान मकान व लाखों की गाड़ियों का इश्तेमाल करने वाले गरीब कैसे हो सकते हैं? आज वास्तविक धरातल पर सोचने व काम करने की जरूरत है। अभी तक सरकार केवल वेतन भोगी व कागजी गरीबों की ही मदद कर रही है। वेतन भोगी बिलम्ब से ही सही लेकिन वेतन पाएंगे जबकि कागजी गरीब हर तरह से लाभान्वित हो रहे हैं।इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने सामाजिक संगठनों व सरकार से मांग की कि वे आज कोरोना संकट काल के राष्ट्रीय आपदा में अवैतनिक वास्तविक गरीब, मध्यम वर्ग, छोटे देवालय व पुरोहितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं।

Share To:

Post A Comment: