समाजवादियों ने विरोध दिवस मनाकर श्रम कानून का किया विरोध 

मजदूरों के गुलामी का कानून वापस ले सरकार.. शिव सिंह

कलयुग की कलम 

देश भर में  केंद्र सरकार की श्रम विरोधी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आज देश के श्रमिक संगठनों के आवाहन पर मध्य प्रदेश के कई  समाजवादी संगठन एवं  राजनैतिक दल विरोध दिवस में शामिल होकर श्रमिक विरोधी कानून वापस लिए जाने मांग किए उक्त कानून का विरोध करते हुए समाजवादी नेता कौशल सिंह मीसाबंदी बृहस्पति सिंह राष्ट्रीय जन जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बुद्धसेन पटेल समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामायण सिंह जनता दल सेक्युलर के प्रदेश अध्यक्ष शिव सिंह एडवोकेट समग्र उत्थान पार्टी के पूर्व प्रत्याशी शिवकुमार बाबा मिश्रा समाजसेवी ज्ञानेंद्र गौतम समाजसेवी विश्वनाथ पटेल चोटीवाला जेडीएस नेता मोहम्मद आबिद रामेश्वर सोनी  तौहीद खान ने कहा कि इस कोरोना महामारी संकट दौरान केंद्र की मोदी सरकार ने श्रम कानून में परिवर्तन करते हुए देश के करोड़ों प्रवासी मजदूरों खेतिहर मजदूरों  के सामने बड़ा संकट पैदा कर दिया है सरकार ने मजदूर के काम के 8 घंटे को बढ़ाकर 12 घंटा करने एवं जायज मांगों को लेकर किए जाने वाले शांतिपूर्ण आंदोलनों पर प्रतिबंध सहित अन्य कानूनी मुद्दों को खत्म करके गंभीर संकट पैदा किया गया है  आज महामारी संकट में करोड़ों प्रवासी मजदूरों खेतिहर मजदूरों के पास जीविकोपार्जन का संकट उत्पन्न हो चुका है पहले श्रमिकों को शहरों में बसाया गया रोजगार दिया गया और आज विपत्ति के समय सरकार व उद्योगपतियों ने मुंह मोड़ लिया केंद्र सरकार की लॉकडाउन समय का मजदूरों को पूरा वेतन दिए जाने की घोषणा फर्जी साबित हो गई  रोजगार खत्म हो गया सभी छोटे-मोटे धंधे बंद पड़े हुए हैं रोजगार बंदी से देश का मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच  गया है आज सन 1947 की तरह देश के विभाजन  पर विस्थापन जैसे हालात पैदा हो गए हैं  मजदूर सड़कों पर दम तोड़ रहा है पुलिस की लाठियां खा रहा है जेल जा रहा है  देश में श्रमिकों की संख्या 54 करोड़ है जिनमें से 93 फ़ीसदी असंगठित क्षेत्र के मजदूर हैं उन सभी का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है अब सरकार ने घोषणा की है कि वह सुबह 6 बजे से रात के 12 बजे तक बाजार खोलेगी तथा मजदूरों से 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम लिया जाएगा यह मजदूरों को गुलाम बनाने का षड्यंत्र है जिसे विफल करना भारत के संविधान में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति का कर्तव्य है विगत डेढ़ सौ वर्षो में मजदूर आंदोलनों ने देश में 44 श्रम कानून बनवाकर लागू कराए थे जिनको मोदी सरकार ने कारपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के नियत से खत्म कर दिया है सरकार लगातार मजदूरों का शोषण कर पूंजीपति उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है मोदी सरकार देश की नहीं पूंजीपतियों व उद्योगपतियों की सरकार बन कर रह गई है समाजवादियों ने कहा सरकार श्रमिक कानूनों में किए गए संशोधन वापस ले तथा लॉकडाउन दौरान का सभी कामगारों को वेतन दिलाया जाए सभी श्रमिकों की पुराने रोजगार में बहाली की जाए प्रवासी मजदूरों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह की व्यवस्था सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजीकरण पर रोक किसानों खेतिहर मजदूरों को 10 हजार रुपए प्रति महीने देने तथा कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाए जाने शीघ्र कार्यवाही की जाए

                         

                 शिव सिंह एडवोकेट

प्रदेश अध्यक्ष जनता दल सेक्युलर मध्य प्रदेश

Share To:

Post A Comment: