क्याहाले दिल मध्यप्रदेश जनता त्रस्त, सरकार मस्त, जनता के आंसू पोछने वाला 'Quarantine' प्रदेश में अघोषित कांग्रेस बीजेपी गठबंधन सरकार चल रही है?

क्या शिवराज को कमलनाथ सरकार द्वारा क्लीन चिट देना इसी बात का संकेत था?

क्या सबकी मिलीभगत से पॉज़िटिव नेगेटिव के आंकड़ों से अस्पतालों की चांदी हो रही है

15 साल के कार्यकालों के पापो को विपक्ष की 15 महीने की सरकार ने विधानसभा के पहले ही सत्र में गंगा स्नान करवाकर धो दिए। तो अब उपचुनाँव में कांग्रेस का कोई भी आरोप या दोषियों पर कार्यवाही की बाते बेमानी। 

प्रदेश में चल रही अघोषित कांग्रेस बीजेपी गटबंधन सरकार

बिल्ली के गले मे घंटी बांधने वाल कोई नही। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शिवराज   सरकार को अस्थिर दर्शा रहे है। उन्हें लगता है उपचुनाँव के पहले मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही भारतीय जनता पार्टी में फूट पढ़ जाएगी और कई नेता कांग्रेस का दामन थाम लेंगे। उपचुनाँव में सरकार के विधायकों के साथ बिजली बिल के मुद्दे पर जनता आसानी से कांग्रेस को अपना समर्थन दे देगी। इसमे कोई दो राय नही है कि पूर्व कमलनाथ सरकार से जनता संतुस्ट थी। चाहे फिजूल खर्च हो, भूमाफियाओं पर कार्यवाही हो,बिजली बिल हो जनता को लंबे समय बाद राहत मिली थी। लेकिन *कांग्रेस के कद्दावर रास्ट्रीय नेता और उनके समर्थकों ने अपने संघटन के साथ जनता को धोखा दे अपने हित साध लिए। त्रेता युग के विभीषण भले ही इतने बदनाम न हुए हो लेकिन कलयुग में जनता की नजर में ऐसे नेता गद्दार कहलाते है। जिन्हें अब जनता का समर्थन मिलेगा कहना मुश्किल  है।

कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो जनहित की सरकार गिराने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया आज भी खाली हाथ ही है। उनके कद की लक्षमण रेखा भारतीय जनता पार्टी ने जनता के नकारे नेता शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री बना खिंच दी।....…….....आज विपक्ष की बाल्टी से नहा धोकर पवित्र हुए शिवराज ने शून्य से शुरुवात कर दी है* मध्यप्रदेश की राजनीति में अपने ही दल के कई नेताओं को अपनी राजनीतिक बुद्धि से कई बार पछाड़ घर बैठाने वाले शिवराज के लिए सिंधिया बड़ा नाम नही ये भी उपचुनाँव के परिणाम से एक बार फिर साबित हो जाएगा। क्योंकि अगर भारतीय जनता पार्टी उपचुनाँव हारती है तो ठीकरा फूटेगा  ज्योतिरादित्य सिंधिया के सर। ओर अगर गलती से जीत जाती है तो सारे नंबर शिवराज की कागजी योजनाओ में जुड़ जाएंगे। दूल्हे की घोड़ी पर मजबूती से बैठे नजर आएंगे शिवराज। ज्योतिरादित्य खाली हाथ ही रहेंगे।

अब बात करे कोरोना महामारी की तो प्रदेश में जनता को मौत का डर दिखा घर बैठा सड़को पर मनमानी करने गरीब,मजदूर,किसान के हितैषी बन अपने चहेते अधिकारियों को प्रदेश में छोड़ दिया है। पॉजिटिव निगेटिव के आंकड़ों की जादूगीरी में निजी अस्पतालो के साथ होटल,मेर्रिज गार्डन, सेनिटाइजर,मास्क,ppe किट,ग्लोब्स,निशुल्क राशन,भोजन,प्रवासी मजदूरों की बस,प्रदेश व अन्य प्रदेशों के मजदूरों के खातों में रुपए डालने तक कोरोडो का खेल चल रहा है। कोई देखने सुनने बोलने वाला नही। आम जनता गरीब मजदूर,हाथ ठेले वाले, दैनिक व्यवसायी, निजी नोकरी पैसा मोत के डर से शहमें आने वाले कल की बेरोजगारी भुखमरी की चिंता में जीवन जी रहा है।

सरकार की कागजी घोषणाओं का लाभ अधिकारियों की फाइलों में दम तोड़ रहा है

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