विश्व विलक्षण प्रतिभा के धनी , एशिया के एकमात्र दिब्यांग  विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति  पद्म विभूषण जगदगुरु रामभद्राचार्य जी हमेशा जैसा कि आप सब जानते हैं कि प्रत्येक वर्ष गंगा दशहरा एवं गुरूदेव भगवान का पदाभिषेक महोत्सव हम सब गुरूभाई हरिद्वार स्थित वसिष्ठायनम् आश्रम में मनाते थें। इस वर्ष चित्रकूट के जंगलों में तपस्यारत संतो की इच्छा थी कि हमारे आचार्य का अभिषेक महोत्सव है तो हम सब साधु  संत साथ मिलकर मनायेंगे ।परम उदार जगदगुरु  गुरूदेव भगवान  ने उनकी प्रार्थना स्वीकार करकें आज 40  वर्ष बाद ताठी घाट चित्रकूट पहुँचे।  और संतो को आशीर्वाद प्रदान करके उनके साथ सत्संग किया एवं उन संतो के साथ ही पंगत भोजन  पाया। आज अद्भुत आनंद था वन में, संतो के मुख से बारंबार यही निकल रहा था कि *“ हमारे राम जी हमें दर्शन देने आज पुनः वन आ गए हैं “*। 

आज के आनंद को लेखनी के माध्यम से नहीं वर्णन नहीं किया जा सकता  अत: चित्र के माध्यम से आप दर्शन करके उनके भावों का आनंद लिजिए।ऐसे ही सनातन धर्म की रक्षा, वैदिक साहित्य के गुढ प्रंसग की चर्चा मानव जीवन के लिए आप सदैव करते हुए दीर्घायु हो यही गंगा दशहरा पर्व पर हम सभी सेवक आपके चरणों में वंदना करते हैं। इस अवसर पर  चित्रकूट के संत गण ,  जगदगुरु जी के उतराधिकारी  आचार्य  रामचंद्रदास जी , डा0 मनोज कुमार पांडेय ,  दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव अभय महाजन जी  , परिकर आदि उपस्थित रहे। इस आशय की जानकारी दिब्यांग  विश्वविद्यालय के  पी0आर0ओ0 एस0 पी0 मिश्रा ने दी।


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