बहुत ढूंढा शहर गांव कस्बा 

भटकता रहा लेकर दिल में एक जज़्बा ,

पर कहीं भी नहीं दिखी 

खुशियों की दुकान ।

मोहब्बत खुशी प्यार नहीं बिकता आजकल 

तभी झूठ की दुकान में झूठे मेहमान ।

अजी होठों पर नक़ली मुस्कान

कब तक फैलाते रहोगे ?

रिश्तेदारी यूं ही गाहेवक्त बताते रहोगे 

दिल में एक ख्वाइश है ,

जो अक्सर हम सबको बताते 

काश बचपन के वो खुशगवार दिन 

फिर से लौट आते ? 

 डॉ.मन्तोष भट्टाचार्म

मदर टेरेसा नगर

  जबलपुर (म.प्र)


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