अश्वनी बड़गैंया अधिवक्ता,  स्वतंत्र पत्रकार

कलयुग की कलम 

नामचीनों को बांट रहे समाजसेवी का तमगा

पार्टी का हाईकमान देश के नामचीनों का शुद्धिकरण करने नाटकीय अभियान चलाकर गंगोत्री को गटर बनाने लगा हुआ है तो फिर पार्टी की स्थानीय ईकाईयां भला कैसे पीछे रह सकती हैं ।

ऐसा ही एक वाक्या इन दिनों जनमानस के बीच चर्चा में तैर रहा है । कुछ दिनों पहले पार्टी ने समाज विशेष के लोगों को कारोबार सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए अपने पार्टी कार्यालय में बुलाकर किट वितरित की थी । पार्टी के स्थानीय कर्णधारों हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा करते हुए मेहनत करे मुर्गा अंडा खायें फकीर की तर्ज पर खुद का महिमामंडन कराया मगर ये भूल गए कि गंदगी पानी तैर कर भीतरी कहानी उजागर कर ही देती है । यहां भी वैसा ही हुआ । 

पार्टी द्वारा समाज विशेष के लोगों को बांटे गए किट की उपलब्धता करायी शहर के एक नामचीन गुटका किंग कहे जाने वाले तस्कर ने ! कोविड 19 के कारण देशव्यापी लॉक डाउन के दौरान जब सारे कारोबार से रोक सी लगी हुई थी तब भी गुटका की उपलब्धता में कोई कमी नहीं आई थी ।

ये अलग बात है 5 रुपये का तानसेनी 30 रुपये में, 20 रुपये की राजश्री 80 रुपये में बेचा जा रहा था । हां इसके लिए बाकायदा पर्दे के पीछे भोग भी लगाया जाता रहा है । कितना बढ़िया काम किया पार्टी ने एक तरफ खुद को दानवीर कर्ण की तरह प्रोजेक्ट कर डाला तो दूसरी तरफ शहर के एक दागदार चेहरे को समाजसेवी की तरह पेश करने की कोशिश की गई ।

शहरवासी बोलें कुछ नहीं तो इसका ये मतलब कतई नहीं है कि वे जानते भी कुछ नहीं हैं । बाबू ये पब्लिक है सब जानती है । वो तो ये भी जानती है कि पार्टी के कर्णधार बने बैठे लोग जो कलतक "हैण्ड टू माउथ" हुआ करते थे आज धन्नासेठों की कतार में कैसे बैठे हुए हैं ।

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