कहो तो कह दूं : थानों में सही नहीं रहती पुलिस की शब्दावली

KKK न्यूज़ 

पुलिस और पब्लिक के बीच तालमेल बैठाने मुख्यालय से पुलिस को पब्लिक से अच्छा आचरण या यूं कहें व्यवहार करने के फरमान भले ही जारी होते हों, लेकिन धरातल में ऐसा कुछ खास देखने को नहीं मिलता। आज भी थानों में पुलिस की शब्दावली सही नहीं रहती। यदि थोड़ा बहुत जान और पहचान है तो ठीक, वर्ना फरियाद लेकर पहुंचे पीड़ितों को ज्यादातर यहां से पुलिस की दुत्कार ही मिलती है। ऐसा लगता है जैसे कोई यहां अपनी फरियाद लेकर नहीं, बल्कि बहुत बड़ा गुनाह करके आया हो। हम यह भी नहीं कहते कि पीड़ित की फरियाद को यहां सुना और लिखा नहीं जाता, लेकिन इससे पहले ऐसी दुर्गति होती है कि पीड़ित का आधा भूत मौके पर ही उतर जाता है। हम कहने की कोशिश यह कर रहे हैं कि पुलिस मुख्यालय का फरमान थानों में कोई मायने नहीं रखता। सवाल यह उठता है कि ऐसे में फिर पुलिस और पब्लिक के बीच तालमेल कैसे बैठेगा ? 

आशीष हल्दकार  कटनी/स्लीमनाबाद

Share To:

Post A Comment: