कहनी अजब गजब शहडोल जिले के बुढांर की

प्यादों की बलि चढ़ाकर पर्दे के पीछे खेल रहे शहर में जयचन्द

जिले से शहर तक के आंकड़े उठाएं जाएं तो कई जयचन्दों और सेठो की कहानी पुलिस डायरी से अभी भी अछूती है कोई सेठ की आड़ में खादी तो कोई खादी की आड़ में दो नम्बर का कारोबारी ऐसे दर्जनो नाम जिम्मेदारों द्वारा निष्पक्षता से खंगालने पर सामने आएंगे जो आज भी रहस्य है

अविनाश शर्मा
शहडोल ब्यूरो चीफ

शहडोल -अजब-गजब शहडोल में कहीं रेत खदानों में गुंडागर्दी तो कहीं शहर में तमंचे की नोक पर दहशतगर्दी कहीं लूट कहीं ,चोरी तो कहीं हथियारों की तस्करी जारी है जिसके साक्ष्य बीते दिनों नामचीन बदमाशों व गुंडों की गिरप्तारी से प्रकट हुए 

इसी कड़ी में कुछ बदमाशों ने पुलिस पर हवाई फायर कीए तो कुछ उन हथियारों की तस्करी करते हुए सामने आए 

आखिर लल्लू का जहाँपनाह कौन

पुलिस अरसों से जूते ,चप्पल की दुकान पर बैठने वाले लल्लू गुप्ता का नाम हथियार तस्कर के रूप में सामने लाई है और लल्लू गुप्ता की दुकान का संचालक व उसके आका को पूरा  बुढ़ार शहर जानता है यह सर्वविदित है कि प्रकाश कृष्णानी के कौन-कौन से व्यापार हैं और इनके शागिर्दों के कौन कौन से कारनामें हैं कभी अवैध जमीनों की बिक्री तो होटल में पूरे लाकडाउन में शराब तस्करी तो क्रिकेट के दौर में क्रिकेट सट्टा तो आज प्यादे लल्लू का नाम तस्करी में परवान चढवाकर खुद पर्दे के पीछे से खेल रहा है 

होटल रायल का राजा कौन..??

कभी सड़को और बगीचों में सट्टा की पर्ची काटने वाला सन्त आज आडी जैसे लक्जरी वाहन में घूमता है जो शायद प्रकाश और उसके सागिर्दों की देन है कभी सड़को में खाक छानने वाला संतराम आज प्रकाश के आंगन की वो शोभा है जो बिना प्रदीप्त हुए प्रकाश को प्रज्वलित कर रही है प्रकाश के कई अवैध कारोबार को एक नम्बर में दिखाने वाले इस संतराम पे किसी पाण्डे ने भी अपनी छत्रछाया बनाया है वो अलग बात है रसूख की दम पर प्यादे गिरप्तारी की भेंट चढ़ रहे हैं और आका अभी भी पर्दे के पीछे हैं

इतने दिन बाद दिखी सक्रियता

लगभग एक माह से भी ज्यादा समय से बुढ़ार के होटल रायल में तमंचे व गर्दिशदारो की जमघट किसी पप्पू शुक्ला के रेत गैंग के रूप में आश्रय ली थी किन्तु छोटे-बड़े वारदात व सोशल मीडिया से लेकर अखबारों की सुर्खियां बने रहने के बाद भी होटल रायल में निगहबानो ने निगाहें नही फेरा और जब विकास दुबे का बर्बरता जैसी घटना के तार बुढ़ार से जुड़े तो सभी जिम्मेदारों के कान चौकन्ने हो गए और फिर अपराध को पनाह देने वाले शहर के रसूखदार व जयचन्दों ने इन्हें बलि का बकरा बनाकर पर्दे के पीछे दुबककर सिमट गए

शेष अगले अंक में

Share To:

Post A Comment: